14 अगस्त 2026 को Nifty 50 की शुरुआत थोड़ी सुस्त रही। इंडेक्स **0.20%** गिरकर **24,346** पर खुला। बाजार में खरीदारी का जोर कमजोर दिख रहा है, और निवेशक मिडिल ईस्ट में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और फॉरेन इन्वेस्टर्स (FIIs) की लगातार बिकवाली को देखते हुए सतर्क बने हुए हैं।
भारतीय शेयर बाज़ार ने 14 अगस्त 2026 को कारोबार की शुरुआत थोड़ी सुस्त गति से की। NSE पर Nifty 50 इंडेक्स पिछले बंद भाव से लगभग 0.20% की गिरावट के साथ 24,346 के स्तर पर खुला। फिलहाल, यह इंडेक्स एक सीमित दायरे में कारोबार कर रहा है, जो निवेशकों के बीच आक्रामक खरीदारी की कमी का संकेत देता है।
बाजार की इस चाल के पीछे कई अहम कारण हैं। विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) की लगातार बिकवाली भारतीय इक्विटी पर दबाव बना रही है। इसके अलावा, मिडिल ईस्ट में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव ने अनिश्चितता का माहौल खड़ा कर दिया है। ऐसे माहौल में निवेशक आमतौर पर सतर्क रुख अपनाते हैं और जोखिम कम करने की कोशिश करते हैं।
तकनीकी तौर पर देखें तो Nifty 50 फिलहाल एक कंसॉलिडेशन फेज (consolidation phase) में है। इंडेक्स के लिए 24,250 से 24,300 का स्तर अहम सपोर्ट का काम कर रहा है। अगर इंडेक्स इस सपोर्ट को तोड़ता है, तो और गिरावट देखने को मिल सकती है। वहीं, 24,450 से 24,500 के बीच रेजिस्टेंस (resistance) मौजूद है। इस रेंज से ऊपर निकलने पर ही बाजार में तेजी का रुख बन सकता है।
वैश्विक संकेत भी स्थानीय सेंटिमेंट पर असर डाल रहे हैं। कुछ एशियाई बाजारों में मजबूती दिखी है, लेकिन Nifty की शुरुआत सपाट रही, जो किसी बड़े पॉजिटिव ट्रिगर की कमी को दर्शाता है। ब्रेंट क्रूड ऑयल (Brent crude oil) की कीमतें लगभग $87 प्रति बैरल के आसपास बनी हुई हैं, जो भारत के आयात बिल और महंगाई की उम्मीदों पर असर डाल सकती हैं।
फिलहाल, बाज़ार अपनी अगली दिशा तय करने की कोशिश कर रहा है। निवेशकों का ध्यान इस बात पर है कि क्या इंडेक्स अपने सपोर्ट स्तर को बनाए रख पाता है। आने वाले समय में यह देखना अहम होगा कि भू-राजनीतिक हालात स्थिर होते हैं या FIIs की बिकवाली जारी रहती है।
