Nifty 50 ने अगस्त का महीना **24,080** के स्तर पर एक छोटे दायरे में बंद किया है। जहां देश की GDP ग्रोथ **7.8%** पर मजबूत बनी हुई है, वहीं कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें और ग्लोबल टेंशन बाजार के लिए नई चुनौती बनकर उभरी हैं।
अगस्त का महीना Nifty 50 के लिए काफी सीमित दायरे में बीता है। महीने के अंत में इंडेक्स 24,080 के स्तर पर बंद हुआ। मार्केट एक्सपर्ट्स का मानना है कि इंडेक्स का लंबे समय तक एक छोटे रेंज में रहना अक्सर किसी बड़े तूफान से पहले की शांति जैसा होता है। इसका मतलब है कि इन्वेस्टर्स अभी किसी बड़े ट्रिगर का इंतजार कर रहे हैं।
इकोनॉमी की स्थिति मजबूत
भले ही बाजार सुस्त है, लेकिन देश की इकोनॉमी मजबूती दिखा रही है। फाइनेंशियल ईयर 2026-27 की पहली तिमाही (अप्रैल-जून) में GDP ग्रोथ 7.8% रही है, जिसने रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) के 7% के अनुमान को भी पीछे छोड़ दिया है। हालांकि, होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में जारी तनाव के कारण क्रूड ऑयल की कीमतों में उछाल आया है, जिससे इन्फ्लेशन और कंपनियों के प्रॉफिट मार्जिन पर दबाव बढ़ सकता है।
चार्ट पर क्या हैं जरूरी लेवल्स?
टेक्निकल तौर पर देखें तो 23,800 से 24,000 का लेवल एक मजबूत सपोर्ट जोन का काम कर रहा है। यदि इंडेक्स इस स्तर के नीचे फिसलता है, तो बाजार में बड़ी बिकवाली देखी जा सकती है। वहीं, ऊपर की तरफ 24,400 से 24,600 के स्तर पर रेजिस्टेंस है। अगर निफ्टी इस दायरे को तोड़ता है, तो हमें बड़ी तेजी देखने को मिल सकती है।
किन चीजों पर रखें नजर?
बाजार की दिशा तय करने में दो बड़े फैक्टर्स अहम होंगे: पहला, संस्थागत लिक्विडिटी (Institutional Liquidity) और दूसरा, IPO मार्केट का क्रेज। बाजार में लगातार आ रहे नए IPOs की वजह से सेकेंडरी मार्केट में लिक्विडिटी कम हो सकती है, जो इंडेक्स पर असर डालती है। आने वाले हफ्तों में क्रूड ऑयल की कीमतों और 23,800 के सपोर्ट के टिकाऊपन पर बारीकी से नजर रखना जरूरी होगा।
