सितंबर का महीना Nifty 50 के लिए पिछले ढाई दशकों में सबसे खराब साबित हुआ है। ग्लोबल बॉन्ड यील्ड में तेजी और विदेशी निवेशकों की भारी बिकवाली के चलते बाजार लगातार **7** हफ्तों से दबाव में है। अब सबकी नजरें अक्टूबर में **22,600** के सपोर्ट लेवल पर टिकी हैं।
भारतीय बाजार के लिए सितंबर का महीना एक बुरे सपने जैसा रहा। लगातार 7 हफ्तों की बिकवाली ने मार्केट का सेंटीमेंट बिगाड़ दिया है।
क्यों मचा है बाजार में कोहराम?
बाजार की इस गिरावट के पीछे कई बड़े मैक्रो-इकोनॉमिक कारण हैं। कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतों में उछाल और अमेरिकी 10-वर्षीय ट्रेजरी यील्ड का 5.2% के करीब बने रहना इमर्जिंग मार्केट्स के लिए चिंता का विषय है। घरेलू स्तर पर भारतीय 10-वर्षीय बॉन्ड यील्ड 7.1% के पार निकल गई है और रुपया ₹96.50 प्रति डॉलर के आसपास ट्रेड कर रहा है, जो इक्विटी वैल्यूएशन पर दबाव बना रहा है।
डेरिवेटिव्स डेटा क्या कह रहा है?
तकनीकी चार्ट पर इंडेक्स अब अपने 50-दिन और 200-दिन के मूविंग एवरेज के नीचे फिसल चुका है। डेरिवेटिव्स मार्केट में ओपेन इंटरेस्ट (Open Interest) में 21.1% का इजाफा हुआ है, जो दिखाता है कि ट्रेडर्स नई शॉर्ट पोजीशन बना रहे हैं। सबसे बड़ी चिंता FIIs की बिकवाली है, जिन्होंने रिकॉर्ड 2.67 लाख इंडेक्स शॉर्ट कॉन्ट्रैक्ट्स होल्ड किए हैं, जो हाल के इतिहास का सबसे बड़ा आंकड़ा है।
कहां है उम्मीद की किरण?
बड़ी गिरावट के बावजूद, घरेलू संस्थागत निवेशक (DIIs) और रिटेल इन्वेस्टर अपनी लॉन्ग पोजीशन बढ़ा रहे हैं। हेल्थकेयर सेक्टर जैसे Aurobindo Pharma और Zydus Lifesciences में मजबूती दिख रही है, जबकि IT और रियल एस्टेट सेक्टर में दबाव बना हुआ है। अब निवेशकों की नजरें अक्टूबर के लिए 22,600 के अहम सपोर्ट लेवल पर हैं, जो कि इंडेक्स का 200-वीक मूविंग एवरेज भी है।
