पिछले हफ्ते भारतीय शेयर बाज़ार में शानदार रिकवरी देखने को मिली। निफ्टी 50 इंडेक्स **616** अंक चढ़कर **24,383** पर बंद हुआ, जिसकी अगुवाई IT सेक्टर की **6.75%** की जोरदार उछाल ने की। मजबूत तिमाही नतीजों और बेहतर मॉनसून के संकेतों ने बाज़ार को सहारा दिया, हालांकि निवेशक अभी भी ग्लोबल महंगाई और मध्य-पूर्व के तनाव पर नज़र बनाए हुए हैं।
हफ्ते भर में बाज़ार में आई तेज़ी
भारतीय शेयर बाज़ार ने पिछले हफ्ते ज़बरदस्त वापसी की है। निफ्टी 50 इंडेक्स 2.59% की छलांग लगाकर 24,383.60 के स्तर पर बंद हुआ। यह पिछले चार महीनों में इंडेक्स की सबसे मजबूत साप्ताहिक बढ़त है, जिसका श्रेय जून तिमाही के नतीजों और सुधरते मैक्रोइकॉनॉमिक माहौल को जा रहा है।
IT सेक्टर का जलवा और दूसरे सेक्टर्स का प्रदर्शन
इस तेज़ी में IT सेक्टर सबसे आगे रहा। निफ्टी IT इंडेक्स 6.75% चढ़ा, क्योंकि प्रमुख टेक कंपनियों के नतीजों और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) में बढ़ते निवेश के संकेतों ने निवेशकों का भरोसा लौटाया। इसके अलावा, निफ्टी मीडिया इंडेक्स में करीब 6% और ऑटो इंडेक्स में 5.61% की बढ़त देखी गई। वहीं, डिफेंस और एनर्जी सेक्टर्स में मामूली गिरावट आई।
डोमेस्टिक फैक्टर्स का सपोर्ट
भारतीय बाज़ार को कई घरेलू कारणों से सहारा मिला। रुपये का मज़बूत होना और फॉरेन इंस्टीट्यूशनल इन्वेस्टर्स (FIIs) का लगातार निवेश बाज़ार में लिक्विडिटी बनाए हुए है। दक्षिण-पश्चिम मॉनसून की अच्छी प्रगति से एग्रीकल्चर आउटपुट और रूरल डिमांड को लेकर चिंताएं कम हुईं। ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमतें गिरकर लगभग $87 प्रति बैरल पर आ गईं, जिससे इंपोर्ट कॉस्ट और महंगाई को लेकर निवेशकों को राहत मिली। BSE पर लिस्टेड कंपनियों का मार्केट कैप 10 लाख करोड़ रुपये से ज़्यादा बढ़ा, जबकि इंडिया VIX (वोलेटिलिटी इंडेक्स) 16.2% गिरकर 11.76 पर आ गया, जो बाज़ार में स्थिरता का संकेत देता है।
ग्लोबल चिंताएं और आगे क्या?
घरेलू सकारात्मकता के बावजूद, ग्लोबल माहौल अभी भी जटिल बना हुआ है। अमेरिका में फेडरल रिजर्व ने ब्याज दरों को जस का तस रखा है, लेकिन 9-3 के वोट से यह पता चला कि इंफ्लेशन कंट्रोल पर अधिकारियों में मतभेद है। 30-साल की ट्रेजरी यील्ड 2007 के बाद अपने उच्चतम स्तर पर है। इसके अलावा, अमेरिका-ईरान के बीच तनाव सप्लाई चेन और कमोडिटी कीमतों को प्रभावित कर सकता है। निवेशक अमेरिकी महंगाई के आंकड़ों और आने वाले नतीजों पर मैनेजमेंट की कमेंट्री पर बारीकी से नज़र रखेंगे कि क्या इन अंतर्राष्ट्रीय दबावों के बावजूद बाज़ार की मौजूदा तेजी बनी रह सकती है।
