शेयर बाजार में भारी गिरावट का दौर जारी है। Nifty 50 के **18** स्टॉक्स अपने सालाना हाई से **20%** से ज्यादा गिर चुके हैं, जिससे निवेशकों की कुल **₹31.35 लाख करोड़** की वेल्थ स्वाहा हो गई है।
भारतीय शेयर बाजार इस समय एक बड़े 'वैल्यूएशन रिसेट' से गुजर रहा है। यह गिरावट मामूली नहीं है, बल्कि उन कंपनियों की बड़े पैमाने पर रिप्राइसिंग है जो अब तक हाई वैल्यूएशन पर ट्रेड कर रही थीं। स्थिति की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि Nifty 50 की 50 में से 18 कंपनियों के शेयर अपने 52-वीक हाई से 20% से ज्यादा टूट चुके हैं, जिसे तकनीकी भाषा में 'बियर मार्केट' माना जाता है।
आईटी और बैंकिंग सेक्टर पर दोहरी मार
बाजार की इस गिरावट में सबसे ज्यादा दबाव आईटी (IT) और फाइनेंशियल सर्विसेज सेक्टर पर है। आईटी दिग्गज Infosys और Wipro के शेयर अपने हाई से क्रमशः 40% और 39% तक गिर चुके हैं। इन कंपनियों के लिए क्लाइंट्स की तरफ से खर्च में कटौती और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का बढ़ता प्रभाव चिंता का विषय बना हुआ है।
वहीं, बैंकिंग सेक्टर में HDFC Bank और State Bank of India जैसे दिग्गज भी फंडिंग लागत बढ़ने और सख्त रेगुलेटरी नियमों के कारण दबाव में हैं। इसके अलावा, विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) की लगातार बिकवाली ने आग में घी का काम किया है।
दिग्गजों का हुआ हाल बेहाल
इंडेक्स के हैवीवेट्स की हालत देखें तो देश की सबसे बड़ी कंपनी Reliance Industries का मार्केट कैप अपने पीक से करीब ₹4.76 लाख करोड़ घट चुका है। इसके अलावा Tata Consultancy Services (TCS) ने भी ट्रिलियन में अपनी वैल्यू खोई है। चूंकि ये कंपनियां Nifty 50 में सबसे ज्यादा वेटेज रखती हैं, इसलिए इनका गिरना पूरे इंडेक्स को नीचे खींच रहा है।
क्या है निवेशकों के लिए संदेश?
एक्सपर्ट्स का मानना है कि यह गिरावट कंपनियों के फंडामेंटल की कमजोरी से ज्यादा 'मार्केट सेंटीमेंट' की वजह से है। कई ब्लू-चिप कंपनियां अभी भी मजबूत बैलेंस शीट और स्थिर कैश फ्लो बनाए हुए हैं। बाजार को फिलहाल ग्लोबल बॉन्ड यील्ड्स के स्थिर होने, कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट और विदेशी निवेश की वापसी का इंतजार है। जब तक ये फैक्टर्स सुधरते नहीं, बाजार में उतार-चढ़ाव बना रह सकता है और यह फिलहाल अपने नए 'प्राइस फ्लोर' की तलाश में है।
