साइंस जर्नल की नई रिपोर्ट ने वैश्विक बाजारों की चिंता बढ़ा दी है। क्लाइमेट चेंज के कारण El Niño की तीव्रता में **36%** का इजाफा हुआ है, जिससे फूड सप्लाई, महंगाई और एनर्जी सेक्टर पर गहरा असर पड़ सकता है।
वैज्ञानिकों की लेटेस्ट रिसर्च के अनुसार, 19वीं सदी के मध्य से अब तक El Niño की तीव्रता में 36% की खतरनाक बढ़ोतरी देखी गई है। स्थिति की गंभीरता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि पिछले 40 वर्षों में ही इसमें 16% का उछाल आया है।
मार्केट पर असर और चुनौतियां
प्रशांत महासागर के मध्य हिस्से में तापमान औसत से 2.7°C ऊपर पहुंच चुका है, जो इसे अब तक के सबसे शक्तिशाली साइकल में से एक बनाता है। निवेशकों के लिए यह एक बड़ी चेतावनी है:
- फूड इन्फ्लेशन: गेहूं, चावल, चीनी और एडिबल ऑयल जैसी कमोडिटीज की पैदावार पर असर पड़ने से ग्लोबल लेवल पर फूड प्राइसेज बढ़ सकते हैं।
- सप्लाई चेन: खराब मौसम के कारण पोर्ट कंजेशन और शिपिंग में देरी हो सकती है, जिससे मैन्युफैक्चरिंग कॉस्ट में भारी उछाल आने की आशंका है।
- एनर्जी सेक्टर: गर्मी बढ़ने से बिजली की मांग बढ़ेगी और हाइड्रोइलेक्ट्रिक पावर जनरेशन पर असर पड़ेगा, जिससे एनर्जी मार्केट में वोलाटाइल (Volatility) माहौल बन सकता है।
निवेशकों को अब एग्री-कमोडिटीज और सप्लाई चेन से जुड़ी कंपनियों के मुनाफे पर पैनी नजर रखने की जरूरत है, क्योंकि बदलता मौसम सीधे तौर पर कॉर्पोरेट अर्निंग्स को प्रभावित करेगा।
