AI से छिन रही नौकरियों को बचाने के लिए एक नया 'नेट-जीरो लेबर' (Net-Zero Labour) फ्रेमवर्क चर्चा में है। इसके तहत टोकन सिस्टम का उपयोग कर कंपनियों को AI के गलत इस्तेमाल (कॉस्ट कटिंग) के बजाय प्रोडक्टिविटी बढ़ाने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा।
AI के बढ़ते इस्तेमाल से दुनिया भर में नौकरियों पर मंडराते संकट के बीच अब 'नेट-जीरो लेबर' (Net-Zero Labour) नाम का एक नया इकोनॉमिक कॉन्सेप्ट सामने आया है। जैसे कार्बन-न्यूट्रल नीतियां पर्यावरण को संतुलित करती हैं, ठीक उसी तरह यह मॉडल AI और वर्कफोर्स के बीच संतुलन बनाने की बात करता है।
कैसे काम करेगा 'लेबर-इक्विवेलेंट टोकन' सिस्टम?
इस प्रस्ताव का मुख्य आधार 'लेबर-इक्विवेलेंट टोकन' (Labour-Equivalent Tokens) हैं। इस फ्रेमवर्क में कंपनियों को यह हिसाब रखना होगा कि उनकी AI कंप्यूट पावर ने कितने इंसानों की जगह ली है।
- लेवी या कॉस्ट: जो कंपनियां एंट्री-लेवल कामों में इंसानों को हटाकर AI लगा रही हैं, उन्हें एक तरह की 'डिस्प्लेसमेंट ऑब्लिगेशन' या टैक्स देना होगा।
- क्रेडिट्स: वहीं, जो कंपनियां AI का इस्तेमाल प्रोडक्टिविटी बढ़ाने और नए हाई-वैल्यू रोल बनाने में करेंगी, उन्हें क्रेडिट्स मिलेंगे।
इसका मकसद कंपनियों की सोच बदलना है ताकि वे AI को सिर्फ छंटनी (headcount reduction) का टूल न मानकर, कर्मचारियों की क्षमता बढ़ाने का जरिया समझें।
कारोबार और इनोवेशन पर असर
भले ही यह कॉन्सेप्ट अभी थ्योरिटिकल स्टेज पर है, लेकिन यह रेगुलेटर्स की बदलती सोच का संकेत है। बिजनेस के लिए बड़ा रिस्क यह है कि अगर ऐसी नीतियां लागू होती हैं, तो AI को मैनेज करने की लागत बढ़ जाएगी। एक्सपर्ट्स का कहना है कि अगर लेवी बहुत ज्यादा हुई, तो यह इनोवेशन की रफ्तार को धीमा भी कर सकता है।
International Labour Organization (ILO) का डेटा बताता है कि दुनिया भर में करीब 25% कर्मचारी ऐसे हैं, जिनकी नौकरी पर AI का सीधा असर पड़ सकता है। यह नई रणनीति उन कंपनियों से वसूली गई लेवी का उपयोग रिट्रेनिंग और अप्रेंटिसशिप प्रोग्राम्स के लिए करना चाहती है, जो बिना किसी नए ह्यूमन-सेंट्रिक रोल को पैदा किए ऑटोमेशन का रास्ता चुन रही हैं।
निवेशकों के लिए नजरिया
कॉर्पोरेट लीडर्स और इन्वेस्टर्स को अब यह देखना होगा कि कंपनियां शॉर्ट-टर्म बचत के पीछे भाग रही हैं या लंबे समय के लिए स्किल डेवलपमेंट पर ध्यान दे रही हैं। जो कंपनियां सही तरीके से AI को इंटीग्रेट करेंगी, वे भविष्य के रेगुलेटरी रिस्क से बची रहेंगी। फिलहाल, मार्केट वॉचर्स के लिए यह चर्चा एक बड़े बदलाव का संकेत है, जो आने वाले समय में लेबर रेगुलेशंस को नई दिशा दे सकती है।
