National Statistical Office (NSO) की ताजा Periodic Labour Force Survey 2025 में देश के युवाओं के बीच NEET यानी जो न तो पढ़ाई कर रहे हैं, न नौकरी में हैं और न ही ट्रेनिंग ले रहे हैं, उनकी संख्या में बड़ा इजाफा दिखा है।
National Statistical Office (NSO) द्वारा जारी Periodic Labour Force Survey 2025 के आंकड़े भारत की इकोनॉमी और लेबर मार्केट की एक नई तस्वीर पेश कर रहे हैं। यह सर्वे उन युवाओं की पहचान करता है जो शिक्षा, रोजगार या किसी ट्रेनिंग का हिस्सा नहीं हैं।
कोचिंग हब का 'असर'
रिपोर्ट के मुताबिक, North Delhi में NEET रेट 44.3% तक पहुंच गया है। चौंकाने वाली बात यह है कि यह आंकड़ा बेरोजगारी से ज्यादा प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी से जुड़ा है। यहाँ बड़ी संख्या में युवा सरकारी नौकरी पाने की होड़ में पढ़ाई में व्यस्त हैं, जिससे वे फिलहाल वर्कफोर्स से बाहर हैं। निवेशकों के लिए यह एक संकेत है कि प्रोफेशनल सर्विस देने वाली कंपनियों को टैलेंट हासिल करने में मशक्कत करनी पड़ सकती है।
बिहार और तेलंगाना में संरचनात्मक चुनौती
कोचिंग हब से उलट, Bihar और Telangana के कुछ जिलों की स्थिति चिंताजनक है। Bihar के Pashchim Champaran में NEET रेट 43.6% है और राज्य का औसत 32.1% है। यहाँ यह समस्या पढ़ाई की नहीं, बल्कि स्थानीय स्तर पर नौकरियों की कमी (Job Shortage) की है। वहीं, Telangana के Bhadradri Kothagudem जिले में भी NEET रेट 42.7% दर्ज किया गया है, जो राज्य के अन्य विकसित हिस्सों से काफी अलग है।
मानव संसाधन और प्रोडक्टिविटी पर असर
यह डेटा दिखाता है कि हमारी एजुकेशन सिस्टम और जॉब मार्केट की जरूरतों में बड़ा गैप है। जब देश की एक बड़ी आबादी स्किल ट्रेनिंग नहीं ले रही है, तो यह देश के 'डेमोग्राफिक डिविडेंड' पर असर डालता है। कंपनियों के लिए चुनौती यह है कि उनके पास भीड़ तो है, लेकिन मॉडर्न इंडस्ट्री के लिए जरूरी 'स्किलफुल टैलेंट' की भारी कमी है।
इतना ही नहीं, यह युवाओं की घटती कमाई का असर कंज्यूमर डिमांड पर भी पड़ेगा। अगर युवा पैसा नहीं कमाएंगे, तो डिस्क्रीशनरी स्पेंडिंग (Discretionary Spending) पर दबाव आना तय है, जो लॉन्ग-टर्म में इकोनॉमिक ग्रोथ के लिए एक बड़ा रिस्क है।
