नेपाल में आई विनाशकारी बाढ़ ने ट्रेड रूट्स को पूरी तरह से जाम कर दिया है, जिससे दशैं और तिहार फेस्टिवल सीजन से ठीक पहले रिटेल मार्केट की कमर टूट गई है। करीब **$5 अरब** के नुकसान का अनुमान है, जिससे कंपनियों पर कर्ज का बोझ और कंज्यूमर डिमांड में भारी गिरावट का खतरा मंडरा रहा है।
भारी तबाही और सप्लाई चेन का संकट
26 अगस्त, 2026 को नेपाल के उत्तरी हिस्से में ग्लेशियर झील के फटने से आई बाढ़ ने वहां की रिटेल और लॉजिस्टिक्स इंडस्ट्री को हिलाकर रख दिया है। इस आपदा में 1,200 से ज्यादा लोगों की मौत हुई है। त्योहारों का यह सीजन नेपाल के रिटेल मार्केट के लिए कमाई का सबसे बड़ा मौका होता है, लेकिन अब इन्वेंट्री खत्म होने और सप्लाई चेन के बाधित होने से व्यापारी बड़े संकट में हैं।
खासकर चीन से जुड़ने वाले रसुवागढ़ी और तातोपानी बॉर्डर क्रॉसिंग के बंद होने से जरूरी सामानों की सप्लाई रुक गई है। छोटे और मध्यम दर्जे के रिटेलर्स के पास ऐसी आपदाओं के लिए कोई बीमा कवर (Insurance) नहीं है, जिसके कारण उन पर दिवालिया होने का खतरा बढ़ गया है।
कंपनियों पर वित्तीय मार
कंपनियों को सीधे तौर पर बड़ा वित्तीय नुकसान हुआ है। उदाहरण के तौर पर, SPG Automobiles को बाढ़ के कारण 100 इलेक्ट्रिक गाड़ियों का नुकसान हुआ है, जिसकी वैल्यू 450 मिलियन नेपाली रुपये आंकी गई है। ऐसे में त्योहारी सीजन के दौरान सामान डिलीवर न कर पाने से इन कंपनियों के सालाना सेल्स पर बुरा असर पड़ना तय है।
अर्थव्यवस्था और बैंकिंग सेक्टर पर असर
मैक्रो-इकोनॉमिक मोर्चे पर स्थिति गंभीर है। देश में पुनर्निर्माण की लागत $4 अरब से $5 अरब के बीच रहने का अनुमान है, जो नेपाल की कुल GDP का 10% है। सरकार को अब विकास परियोजनाओं का फंड इमरजेंसी कामों में लगाना पड़ रहा है। इसके अलावा, बैंकिंग सेक्टर में भी हलचल है, क्योंकि कई बैंक शाखाएं तबाह हो गई हैं, जिससे आने वाली तिमाहियों में बैड लोन (Bad Loans) का जोखिम बढ़ गया है।
अब बाजार की नजरें इस पर टिकी हैं कि सरकार कब तक ट्रेड रूट्स को दोबारा चालू कर पाती है और क्या सरकार कोई राहत पैकेज या सस्ता लोन उपलब्ध कराएगी, जो छोटे व्यापारियों को इस मुश्किल दौर से बाहर निकाल सके।
