जाने-माने अर्थशास्त्री Neelkanth Mishra ने भारतीय अर्थव्यवस्था पर अपना भरोसा जताते हुए कहा है कि देश की विकास दर **7%** के आसपास बनी रहेगी। उन्होंने आधिकारिक GDP डेटा पर उठ रहे सवालों को खारिज करते हुए मजबूत कैपिटल फॉर्मेशन और क्रेडिट ग्रोथ को विकास का इंजन बताया है।
World Bank के एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर Neelkanth Mishra ने एक बार फिर दोहराया है कि भारतीय अर्थव्यवस्था 7% या उससे अधिक की सस्टेनेबल विकास दर की ओर बढ़ रही है। अप्रैल-जून 2026 की तिमाही में दर्ज 7.8% की GDP ग्रोथ पर उठ रहे सवालों के बीच, Mishra का यह बयान काफी अहम माना जा रहा है।
डेटा पर छिड़ी बहस और सच्चाई
पूर्व फाइनेंस सेक्रेटरी S.C. Garg समेत कई आलोचकों ने आधिकारिक आंकड़ों की विश्वसनीयता पर सवाल उठाए थे। इस पर प्रतिक्रिया देते हुए Mishra ने कहा कि फरवरी 2026 में पेश की गई नई GDP सीरीज ने इकोनॉमिक रिपोर्टिंग की मेथडोलॉजी और क्रेडिबिलिटी को काफी बेहतर बनाया है। उनके मुताबिक, आलोचनाएं तथ्यों पर आधारित नहीं हैं।
क्यों मजबूत दिख रही है इकोनॉमी?
Mishra के अनुसार, अर्थव्यवस्था की मजबूती केवल आंकड़ों में नहीं, बल्कि जमीन पर भी दिख रही है:
- कैपिटल फॉर्मेशन: नई एसेट और इन्फ्रास्ट्रक्चर पर खर्च में लगातार तेजी आ रही है।
- इंडस्ट्रियल डिमांड: स्टील और सीमेंट की बढ़ती मांग साफ संकेत दे रही है कि औद्योगिक गतिविधियां रफ्तार पकड़ रही हैं।
- क्रेडिट मोमेंटम: कर्ज लेने की बढ़ती प्रवृत्ति यह बताती है कि बिजनेस विस्तार की ओर देख रहे हैं।
चुनौतियां और रिस्क फैक्टर्स
सब कुछ ठीक दिखने के बावजूद, Mishra ने लेबर मार्केट और आम लोगों की वास्तविक आय (Real Wage Growth) को लेकर चिंताओं को स्वीकार किया है। उन्होंने चेतावनी दी है कि ग्लोबल कैपिटल कॉस्ट में बढ़ोतरी से बिजनेस के लिए प्रोजेक्ट्स को फंड करना महंगा हो रहा है। इसके अलावा, क्रूड ऑयल की कीमतों में उतार-चढ़ाव और जियो-पॉलिटिकल तनाव आने वाले समय में विकास दर के लिए बड़े रिस्क बने रह सकते हैं।
