State Bank of India की एक नई रिपोर्ट के मुताबिक, भारत के **45.6%** परिवार अब डिजिटल माध्यमों से खर्च कर रहे हैं। हालांकि, अभी भी **54.4%** आबादी नकद (Cash) को ही प्राथमिकता दे रही है, जिसमें आय का स्तर एक बड़ा फैक्टर बनकर उभरा है।
भारत डिजिटल अर्थव्यवस्था की ओर तेजी से कदम बढ़ा रहा है। State Bank of India की हालिया रिसर्च रिपोर्ट बताती है कि देश के 45.6% परिवार अब कम से कम एक श्रेणी में डिजिटल पेमेंट का इस्तेमाल कर रहे हैं। हालांकि, यह डेटा इस बात की भी याद दिलाता है कि 54.4% आबादी आज भी अपनी खरीदारी के लिए नकद (Cash) पर ही निर्भर है।
आय का स्तर और डिजिटल एडॉप्शन
रिपोर्ट के अनुसार, डिजिटल भुगतान का चलन घर की आर्थिक स्थिति पर निर्भर है। टॉप 20% इनकम ब्रैकेट वाले परिवारों में डिजिटल एडॉप्शन रेट 69.5% है, जबकि सबसे निचले 20% आय वर्ग के लिए यह आंकड़ा गिरकर सिर्फ 25.3% रह जाता है। दिलचस्प बात यह है कि डिजिटल का उपयोग करने वाले घरों का मंथली प्रति व्यक्ति कंजम्पशन खर्च (Per Capita Consumption Expenditure) सामान्य से 7.5% अधिक है। इसका मतलब है कि तकनीक का इस्तेमाल करने वाले उपभोक्ता न केवल खर्च करने में आगे हैं, बल्कि उनका बास्केट भी ज्यादा डायवर्सिफाइड है।
सामान की श्रेणी का असर
खरीदारी किस चीज की हो रही है, यह भी भुगतान के तरीके को तय करता है। कंज्यूमेबल्स और सर्विसेज में 40% डिजिटल ट्रांजेक्शन हो रहे हैं, जबकि ड्यूरेबल गुड्स में यह आंकड़ा 23.3% है। वहीं, खाने-पीने की चीजों के लिए लोग आज भी फिजिकल मार्केट्स जाना ही पसंद करते हैं। फल, सब्जी और प्रोटीन जैसे सामानों की गुणवत्ता को खुद जांचने की आदत के कारण डिजिटल प्लेटफॉर्म्स अभी भी इस सेगमेंट में पूरी तरह से भरोसा नहीं जीत पाए हैं।
आगे का रास्ता और चुनौतियां
आधे से अधिक आबादी का आज भी नकद का इस्तेमाल करना बताता है कि देश के ग्रामीण और अर्ध-शहरी इलाकों में डिजिटल साक्षरता और इंटरनेट कनेक्टिविटी के मोर्चे पर अभी भी काम बाकी है। निवेशकों के लिए यह बाजार का एक जटिल परिदृश्य पेश करता है। ई-कॉमर्स और डिजिटल कंपनियों की भविष्य की ग्रोथ इस बात पर निर्भर करेगी कि वे कितनी जल्दी कैश पर निर्भर आबादी का भरोसा जीतकर उन्हें डिजिटल इकोसिस्टम में ला पाती हैं।
