Narnolia Financial Services के CIO शैलेन्द्र कुमार ने आगाह किया है कि US 10-year Treasury yields **6%** तक जा सकती हैं। **4.7%** की महंगाई दर के अनुमान से भारत जैसे इमर्जिंग मार्केट्स से पैसा निकलने और कर्ज वाली कंपनियों पर दबाव बढ़ने का बड़ा रिस्क है।
Narnolia Financial Services के चीफ इन्वेस्टमेंट ऑफिसर शैलेन्द्र कुमार ने वैश्विक अर्थव्यवस्था के बदलते रुख पर चिंता जताई है। उनका मानना है कि अगर US 10-year Treasury yields 6% के स्तर को छूती हैं, तो यह ग्लोबल फाइनेंशियल मार्केट के लिए एक बड़ा 'स्ट्रेस टेस्ट' साबित होगा। यह अनुमान 4.7% की लगातार बनी हुई महंगाई दर पर आधारित है, जो पूरी दुनिया में पैसे की कीमत (cost of money) को बदल देगा।
FII आउटफ्लो का खतरा
जब अमेरिकी बॉन्ड्स पर रिटर्न बढ़ता है, तो सुरक्षित निवेश की तलाश में ग्लोबल निवेशक इमर्जिंग मार्केट्स (जैसे भारत) से अपना पैसा खींचने लगते हैं। इससे FII का रुझान कम हो सकता है और घरेलू बाजार में लिक्विडिटी का दबाव बढ़ सकता है। अन्य इमर्जिंग मार्केट्स के साथ कड़ी प्रतिस्पर्धा के चलते भारतीय शेयरों का आकर्षण भी प्रभावित हो सकता है।
कर्ज वाली कंपनियों पर दबाव
बढ़ती ब्याज दरें उन कंपनियों के लिए किसी चुनौती से कम नहीं हैं, जो भारी कर्ज के बोझ तले दबी हैं। जैसे-जैसे उधार लेने की लागत (borrowing cost) बढ़ेगी, इन कंपनियों का नेट प्रॉफिट मार्जिन सिकुड़ जाएगा, जिससे उनकी भविष्य की ग्रोथ और विस्तार योजनाएं धीमी हो सकती हैं।
पोर्टफोलियो में बदलाव
बाजार की हालिया अस्थिरता को देखते हुए Narnolia ने अपनी रणनीति बदली है। फर्म ने महंगे मिड-कैप और स्मॉल-कैप शेयरों में अपना एक्सपोजर कम किया है। इसके बजाय, अब बैंकिंग और ऑटोमोबाइल जैसे सेक्टरों पर फोकस किया जा रहा है, जो अपेक्षाकृत अधिक स्टेबल और सही वैल्युएशन पर उपलब्ध हैं।
क्रूड ऑयल का असर
भारतीय बाजार के लिए क्रूड ऑयल की कीमतें एक और बड़ा सिरदर्द बनी हुई हैं। ब्रेंट क्रूड के ऊंचे भाव महंगाई को हवा दे रहे हैं, जिससे चालू खाता घाटा (Current Account Deficit) भी प्रभावित हो सकता है। निवेशकों को आने वाले समय में FII के डेटा, क्रूड ऑयल के भाव और कंपनियों के तिमाही नतीजों पर पैनी नजर रखनी चाहिए।
