पेपर लीक की समस्या को जड़ से खत्म करने के लिए Nandan Nilekani की टास्क फोर्स ने कमर कस ली है। अब सरकारी परीक्षाओं में AI से जेनरेटेड सवाल और कंप्यूटर बेस्ड टेस्टिंग (CBT) लाने का प्रस्ताव रखा गया है।
पेपर लीक पर लगाम लगाने की तैयारी
Nandan Nilekani के नेतृत्व वाली टास्क फोर्स ने नेशनल एग्जाम रिफॉर्म्स के लिए एक नया ब्लूप्रिंट तैयार किया है। इसके तहत पुराने ढर्रे के पेपरों की जगह अब AI-आधारित सिस्टम लेने वाला है। इसमें सवाल पहले से प्रिंट होने के बजाय परीक्षा शुरू होने से ठीक पहले AI द्वारा रीयल-टाइम में जेनरेट किए जाएंगे।
क्यों फेल हो जाएगी पेपर लीक की साजिश?
लीक माफियाओं की कमाई का जरिया ही यही होता है कि वे परीक्षा से काफी पहले पेपर चोरी कर लेते हैं। डायनामिक सवाल और रीयल-टाइम जनरेशन के बाद, पेपर चोरी का समय ही नहीं बचेगा, जिससे इन जालसाजों की मेहनत बेकार हो जाएगी।
इंफ्रास्ट्रक्चर की भारी मांग
इस बदलाव के लिए सरकार को अपने 1,50,000 मौजूदा टेस्टिंग सेंटर्स को अपग्रेड करने की जरूरत होगी। जुलाई 2026 से अब तक लगभग 60 से ज्यादा बैठकों के बाद यह सुझाव आया है कि एजुकेशन सेक्टर में अब IT सर्विसेज और साइबर सिक्योरिटी का दखल बढ़ेगा।
चुनौतियां और रिस्क
हालांकि यह प्लान क्रांतिकारी है, लेकिन इसमें साइबर हमलों का खतरा बना हुआ है। साथ ही, ग्रामीण भारत में इंटरनेट और कंप्यूटर की पहुंच न होने से एक बड़ा डिजिटल डिवाइड भी खड़ा हो सकता है। फिलहाल यह योजना अभी कंसल्टेटिव फेज में है, और बाजार की नजरें अब इस पर टिकी हैं कि सरकारी टेंडर की प्रक्रिया कैसे आगे बढ़ती है।
