Namo Drone Didi पहल के जरिए ग्रामीण महिलाएं खेती में ड्रोन उड़ाने की ट्रेनिंग ले रही हैं। सरकार इस पर **80%** की भारी सब्सिडी दे रही है, जिसका उद्देश्य खेती की दक्षता बढ़ाना और महिलाओं के लिए कमाई के नए रास्ते खोलना है।
सरकार का बड़ा निवेश
सरकार ने कृषि क्षेत्र को मॉडर्न बनाने के लिए ₹1,261 करोड़ का फंड एलोकेट किया है। इस प्रोग्राम के तहत सेल्फ-हेल्प ग्रुप्स (SHGs) को ड्रोन खरीदने, उनके सामान, इंश्योरेंस और मेंटेनेंस के लिए 80% तक सब्सिडी दी जा रही है, जिसकी अधिकतम सीमा ₹8 लाख प्रति ग्रुप तय की गई है।
कैसे काम करेगा यह मॉडल?
हर ग्रुप अपनी एक सदस्य को 15 दिन की अनिवार्य ट्रेनिंग दिलाएगा, ताकि उसे DGCA (Directorate General of Civil Aviation) का सर्टिफिकेशन मिल सके। दूसरी सदस्य को टेक्निकल असिस्टेंट के तौर पर ट्रेन किया जाएगा। इनका मुख्य काम खेतों में ड्रोन के जरिए पेस्टिसाइड्स और फर्टिलाइजर्स का छिड़काव करना है, जिससे हर ग्रुप को कम से कम ₹1 लाख सालाना कमाई का लक्ष्य रखा गया है। सरकार का टारगेट 2025-26 फाइनेंशियल ईयर के अंत तक 15,000 महिला-संचालित SHGs को इसमें कवर करना है।
राह में चुनौतियां
सब्सिडी और रोजगार के मौके तो बहुत हैं, लेकिन एक्सपर्ट्स कुछ व्यावहारिक दिक्कतों की तरफ भी इशारा कर रहे हैं। ड्रोन की लिमिटेड बैटरी लाइफ और खेतों तक इसे लाने-ले जाने की लॉजिस्टिक समस्याएं इसकी सफलता पर सवाल खड़े करती हैं। इसके अलावा, ग्रामीण इलाकों में हाई-टेक इक्विपमेंट की रिपेयरिंग और मेंटेनेंस एक बड़ा बॉटलनेक हो सकता है। अगर ड्रोन खराब होता है, तो किसानों की सर्विस में देरी होगी, जिससे काम प्रभावित होगा।
अंत में, क्या ये SHGs सब्सिडी खत्म होने के बाद भी अपने दम पर मुनाफा कमा पाएंगी? यह देखने वाली बात होगी कि क्या वे भविष्य में स्वतंत्र रूप से अपना बिजनेस सस्टेन कर पाती हैं या नहीं।
