Nagpur Income Tax Appellate Tribunal (ITAT) ने एक महत्वपूर्ण फैसले में कहा है कि टैक्सपेयर्स असेसमेंट ईयर 2025-26 के लिए Short-Term Capital Gains (STCG) पर Section 87A के तहत टैक्स रिबेट का दावा कर सकते हैं।
फैसले का आधार
Nagpur ITAT ने यह स्पष्ट किया है कि टैक्सपेयर्स Section 111A के तहत आने वाले शॉर्ट-टर्म कैपिटल गेन्स (STCG) पर अपनी टैक्स लायबिलिटी को कम करने के लिए Section 87A की रिबेट का उपयोग कर सकते हैं। अब तक Centralised Processing Centre (CPC) के ऑटोमेटेड सिस्टम अक्सर इन रिबेट क्लेम्स को खारिज कर देते थे, जिससे निवेशकों को अतिरिक्त टैक्स डिमांड का सामना करना पड़ रहा था। ट्रिब्यूनल के मुताबिक, उस समय के कानून में STCG के खिलाफ इस रिबेट को रोकने का कोई स्पष्ट प्रावधान नहीं था।
निवेशकों के लिए क्या हैं मायने?
अगर आपको भी इनकम टैक्स विभाग से रिबेट खारिज होने का नोटिस मिला है, तो यह फैसला आपके लिए एक मजबूत कानूनी आधार बन सकता है। हालांकि, यह याद रखना जरूरी है कि ITAT का यह आदेश विशिष्ट असेसमेंट इयर्स (2024-25 और 2025-26) के लिए है। टैक्स एक्सपर्ट्स का कहना है कि विभाग के ऑटोमेटेड सिस्टम्स में तुरंत बदलाव की उम्मीद कम है, इसलिए किसी भी विवाद की स्थिति में आपको अपील प्रक्रिया के दौरान इस फैसले का हवाला देना पड़ सकता है।
आगे की चुनौतियां
टैक्स कानून लगातार बदलते रहते हैं और आने वाले Finance Acts में भविष्य के लिए नए प्रतिबंध भी जोड़े जा सकते हैं। इस फैसले का लाभ उन टैक्सपेयर्स को मिल सकता है जिनके केस अभी लंबित हैं, लेकिन अपनी स्थिति को स्पष्ट करने के लिए किसी प्रोफेशनल टैक्स सलाहकार से परामर्श करना हमेशा सही रहता है, क्योंकि हर टैक्स केस अपने तथ्यों और परिस्थितियों के आधार पर ही तय होता है।
