National Statistical Office (NSO) की ताजा रिपोर्ट में बड़ा खुलासा हुआ है। सरकारी कल्याणकारी योजनाओं (Welfare Schemes) और इन-काइंड ट्रांसफर की वजह से देश के **22 करोड़** लोग आर्थिक रूप से बेहतर स्थिति में पहुंचे हैं।
National Statistical Office (NSO) ने साल 2022-23 के कंजम्पशन सर्वे का विश्लेषण कर बताया है कि कैसे सरकार द्वारा बांटे गए अनाज, साइकिल और स्कूल के सामान जैसे गैर-मौद्रिक (Non-monetary) सहयोग ने लोगों की खरीदने की क्षमता को बदला है। इस बदलाव के चलते देश की कुल आबादी का 15.8% हिस्सा अब उच्च कंजम्पशन ब्रैकेट में आ गया है, जिससे आर्थिक असमानता में भी कमी आई है।
कैसे बदल रही है भारतीयों की परचेजिंग पावर?
जब सरकार बुनियादी जरूरतों जैसे भोजन और शिक्षा पर खर्च उठाती है, तो परिवारों के पास अपनी जेब से खर्च करने के लिए अधिक कैश बचता है। इसका सीधा असर कंज्यूमर सेक्टर पर पड़ता है। यह रिपोर्ट साफ करती है कि लो-इनकम ग्रुप्स की क्रय शक्ति में एक बड़ा संरचनात्मक बदलाव आया है, जिससे 'गिनी गुणांक' (Gini coefficient) यानी आर्थिक असमानता के पैमाने में गिरावट दर्ज की गई है।
राज्यों में असमान असर
आंकड़े बताते हैं कि कल्याणकारी योजनाओं का प्रभाव हर राज्य में अलग रहा है। पश्चिम बंगाल इस सूची में सबसे ऊपर है, जहां 40% आबादी का स्तर ऊंचा उठा है। इसके अलावा छत्तीसगढ़, असम, कर्नाटक और उत्तर प्रदेश में भी जबरदस्त सुधार देखने को मिला है। वहीं, गुजरात, हरियाणा और केरल जैसे औद्योगिक रूप से विकसित राज्यों में यह प्रभाव 8% से कम रहा है, क्योंकि वहां पहले से ही रहन-सहन का स्तर बेहतर है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह डेटा अभी भी काफी हद तक रूढ़िवादी (Conservative) है। इसमें 'आयुष्मान भारत' जैसी स्वास्थ्य योजनाओं और सरकारी स्कूली शिक्षा के मूल्य को शामिल नहीं किया गया है। यदि इन सेवाओं को भी जोड़ दिया जाए, तो सुधार का आंकड़ा और भी बड़ा हो सकता है। अब निवेशकों की नजर इस बात पर है कि यह बढ़ी हुई कंजम्पशन क्षमता आगे चलकर मांग (Demand) में कितनी तब्दीली लाती है।
