National Statistics Office (NSO) ने बड़ा फैसला लिया है। अब 2027 से Periodic Labour Force Survey (PLFS) में गिग और प्लेटफॉर्म वर्कर को शामिल किया जाएगा, जिससे Zomato, Swiggy और Uber जैसी कंपनियों के डेटा और रेगुलेशन में स्पष्टता आएगी।
भारत सरकार की नेशनल स्टैटिस्टिक्स ऑफिस (NSO) ने डेटा जुटाने की प्रक्रिया में बड़ा बदलाव किया है। अब 2027 से Periodic Labour Force Survey (PLFS) के जरिए गिग और प्लेटफॉर्म-बेस्ड वर्कर्स की सटीक गिनती की जाएगी। अभी तक इस सेक्टर के लिए निजी संस्थाओं के अनुमानों पर निर्भर रहना पड़ता था, लेकिन अब सरकार के पास अपना आधिकारिक डेटा होगा।\n\n### निवेशकों के लिए क्यों है जरूरी?\n\nनिवेशकों के लिए यह एक लंबे समय से प्रतीक्षित बेंचमार्क की तरह है। Zomato, Swiggy, Uber और Ola जैसी कंपनियों का पूरा बिजनेस मॉडल गिग वर्कर्स पर टिका है। अभी तक अलग-अलग रिसर्च फर्मों के अनुमानों में काफी अंतर होता था, लेकिन NSO का डेटा इन कंपनियों की ग्रोथ और लेबर पर निर्भरता का सही आईना दिखाएगा।\n\n### RBI और पॉलिसी पर असर\n\nबेहतर लेबर डेटा से Reserve Bank of India (RBI) को भी मदद मिलेगी। गिग इकोनॉमी शहरी खपत (Consumption) का एक बड़ा जरिया है। वर्कर की आय और स्थिरता का सही डेटा मिलने से केंद्रीय बैंक को मॉनेटरी पॉलिसी बनाने में ज्यादा सटीक इनपुट मिलेंगे, जो अंततः मार्केट सेंटीमेंट को प्रभावित करेंगे।\n\n### क्या बढ़ सकता है रेगुलेटरी रिस्क?\n\nनिवेशकों को इस डेटा के साथ आने वाले संभावित रेगुलेटरी बदलावों पर भी नजर रखनी चाहिए। यदि सरकारी सर्वे में वर्कर की खराब स्थिति या कम कमाई का डेटा सामने आता है, तो सरकार सोशल सिक्योरिटी, न्यूनतम कमाई या अन्य बेनेफिट्स को लेकर कड़े नियम बना सकती है। ऐसे में इन कंपनियों की कॉस्ट स्ट्रक्चर और प्रॉफिट मार्जिन पर दबाव बनने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता है।
