NSO Data: भारतीयों का बदल रहा खर्च करने का अंदाज, Premium और Luxury पर बढ़ा फोकस

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AuthorSaanvi Reddy|Published at:
NSO Data: भारतीयों का बदल रहा खर्च करने का अंदाज, Premium और Luxury पर बढ़ा फोकस

National Statistical Office (NSO) के ताज़ा आंकड़ों के मुताबिक, फाइनेंशियल ईयर 2025 में भारतीय परिवारों का कुल खर्च **₹169 लाख करोड़** रहा। इसमें **6%** की ग्रोथ देखी गई है, लेकिन असली बदलाव कंजम्पशन पैटर्न में है जहां लोग अब राशन के बजाय लग्जरी, पर्सनल केयर और लाइफस्टाइल सेवाओं पर ज्यादा पैसे खर्च कर रहे हैं।

वित्त वर्ष 2025 के लिए जारी आंकड़ों से साफ है कि भारतीय परिवारों की प्राथमिकताएं अब बदल रही हैं। कुल प्राइवेट कंजम्पशन एक्सपेंडिचर ₹169 लाख करोड़ के स्तर पर पहुंच गया है, जो कि पिछली अवधि के मुकाबले 6% की रियल ग्रोथ दर्शाता है। डेटा का सबसे चौंकाने वाला पहलू यह है कि पैसा जरूरी सामानों (Essentials) की तुलना में लाइफस्टाइल और प्रीमियम कैटेगरी में तेजी से बह रहा है।

लाइफस्टाइल और लग्जरी में बूम

खर्च करने के नए ट्रेंड में सबसे आगे 'लाइफस्टाइल' सेक्टर है। अल्कोहलिक ड्रिंक्स और तंबाकू जैसे उत्पादों पर खर्च 22.4% बढ़कर ₹2.7 लाख करोड़ हो गया है। वहीं, पर्सनल केयर, लग्जरी वॉचेस, कीमती रत्न और प्रीमियम ट्रैवल गियर जैसे सेगमेंट में 19% का उछाल देखा गया, जो अब कुल ₹5.3 लाख करोड़ तक पहुंच गया है। यह साफ दिखाता है कि शहरी और अमीर तबका अब वेलनेस और ग्रूमिंग जैसी चीजों को प्राथमिकता दे रहा है।

सेवाओं (Services) का दबदबा

घरेलू बजट में सर्विसेज का हिस्सा अब बढ़कर 45.2% हो गया है, जो पहले 44.4% था। फाइनेंशियल सर्विसेज और इंश्योरेंस में 10% की बढ़ोतरी (₹11.4 लाख करोड़) और हेल्थकेयर में 9% की वृद्धि (₹8.7 लाख करोड़) बताती है कि भारतीय अब अपनी सुरक्षा और भविष्य को लेकर ज्यादा सतर्क हैं।

खाने-पीने की आदतों में बदलाव

भोजन की थाली में भी अब कन्वीनियंस का तड़का है। सॉफ्ट ड्रिंक्स और जूस जैसे नॉन-अल्कोहलिक बेवरेजेस की खपत 25% उछल गई है। वहीं, प्रोसेस्ड और रेडी-टू-ईट फूड की मांग 9% बढ़ी है, जबकि अनाज और सब्जियों जैसे पारंपरिक सामानों की ग्रोथ काफी धीमी रही है।

निवेशकों के लिए संकेत

बाजार के लिए यह डेटा एक 'वेक-अप कॉल' की तरह है। जो कंपनियां प्रीमियम पोर्टफोलियो पर फोकस कर रही हैं, उन्हें भारी फायदा हो रहा है, लेकिन मास-मार्केट ब्रांड्स पर दबाव बढ़ रहा है। निवेशकों को ध्यान रखना होगा कि प्रीमियम-फोकस्ड कंपनियों के वैल्युएशन (P/E Ratio) काफी ऊंचे हैं, इसलिए बढ़ती महंगाई या आर्थिक सुस्ती अगर डिस्पोजेबल इनकम को चोट पहुंचाती है, तो इन कंपनियों के मार्जिन पर सीधा असर पड़ सकता है।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.