भारतीय शेयर बाजार में NRI निवेशकों का जोश हाई है। FY19 के बाद से NRI की हिस्सेदारी तीन गुना बढ़कर **₹5.6 लाख करोड़** पर पहुंच गई है और एक्टिव अकाउंट्स की संख्या **9.57 लाख** को पार कर गई है।
निवेश की नई रफ्तार
जुलाई 2026 तक के आंकड़ों पर नजर डालें, तो NRI निवेशकों की कुल होल्डिंग ₹5.6 लाख करोड़ के जादुई आंकड़े को छू गई है, जो FY19 में महज ₹1.5 लाख करोड़ थी। इस दौरान एक्टिव अकाउंट्स की संख्या भी 3.14 लाख से बढ़कर 9.57 लाख हो गई है।
सरकार और RBI का बड़ा कदम
इस तेजी के पीछे सरकार और Reserve Bank of India (RBI) द्वारा किए गए नीतिगत बदलाव बड़ी वजह हैं। फरवरी के यूनियन बजट में नियमों को आसान बनाते हुए व्यक्तिगत निवेश की सीमा को 5% से बढ़ाकर 10% कर दिया गया है। साथ ही, एग्रीगेट इन्वेस्टमेंट लिमिट को भी 10% से बढ़ाकर 24% कर दिया गया है, ताकि प्रवासी भारतीयों के लिए भारतीय बाजारों में पैसा लगाना आसान हो सके।
GIFT City बन रहा है नया हब
सिस्टम की पेचीदगियों को दूर करने के लिए International Financial Services Centres Authority (IFSCA) लगातार सुधार कर रहा है। Gujarat International Finance Tec-City (GIFT City) अब एक प्रमुख केंद्र बनकर उभरा है, जहाँ कंप्लायंस और लागत कम होने से निवेश तेजी से बढ़ रहा है। सितंबर 2025 में यह आंकड़ा $536.2 मिलियन था, जो जून 2026 तक बढ़कर $851.1 मिलियन हो गया है।
आगे की राह
IFSCA अब KYC प्रक्रियाओं के लिए एक 'यूनिफाइड यूनिक आइडेंटिफिकेशन नंबर' लाने की तैयारी में है। इससे बार-बार होने वाली कागजी कार्रवाई से छुटकारा मिलेगा और निवेशकों को डिजिटल ऑनबोर्डिंग में आसानी होगी। आने वाले समय में इन सुधारों से बाजार में लिक्विडिटी बढ़ने की उम्मीद है।
