PSU दिग्गजों NMDC और SAIL ने GIFT City के इंटरनेशनल फाइनेंशियल सर्विसेज सेंटर (IFSC) में अपनी नई सब्सिडियरी शुरू की हैं। इसका मुख्य उद्देश्य मिनरल एक्विजिशन और ट्रेजरी ऑपरेशंस को बेहतर बनाना है, जिससे विदेशी वित्तीय हब पर निर्भरता कम होगी।
मिनरल एक्विजिशन के लिए रणनीतिक कदम
NMDC और Steel Authority of India (SAIL) ने गुजरात के GIFT City स्थित इंटरनेशनल फाइनेंशियल सर्विसेज सेंटर (IFSC) में अपनी नई इकाइयां—NMDC Global IFSC Limited और SAIL Global IFSC Limited—लॉन्च की हैं। इस कदम का लक्ष्य दुबई और सिंगापुर जैसे विदेशी ठिकानों से कामकाज को समेटकर भारत के अपने फाइनेंशियल हब में शिफ्ट करना है, ताकि सरकारी कंपनियों की सप्लाई चेन और फाइनेंशियल मैनेजमेंट को और मजबूती दी जा सके।
NMDC की योजना अपनी इस नई इकाई के जरिए ग्लोबल मिनरल एसेट्स (जैसे लिथियम, कोबाल्ट और निकल) की पहचान और अधिग्रहण की प्रक्रिया को तेज करने की है। GIFT City के इस प्लेटफॉर्म से कंपनी को इंटरनेशनल ट्रांजैक्शंस को मैनेज करने में आसानी होगी, जिससे विदेशी अधिकार क्षेत्रों में आने वाली जटिलताएं कम हो जाएंगी।
ट्रेजरी मैनेजमेंट और लागत में कमी
वहीं, SAIL का मुख्य फोकस अपनी ट्रेजरी और इंपोर्ट फाइनेंसिंग की जरूरतों को पूरा करना है। चूंकि SAIL को अपने ब्लास्ट फर्नेस चलाने के लिए भारी मात्रा में कोकिंग कोल का आयात करना पड़ता है, इसलिए GIFT City का यह हब कंपनी को बेहतर फॉरेन करेंसी रिस्क मैनेजमेंट की सुविधा देगा। इसके जरिए SAIL विदेशी मुद्रा में उधार ले सकेगी और करेंसी की अस्थिरता से बचने के लिए हेजिंग इंस्ट्रूमेंट्स का उपयोग कर सकेगी, जिससे मार्जिन पर पड़ने वाला दबाव कम होगा।
निवेशकों के लिए क्या है संकेत?
यह कदम इन कंपनियों की बैलेंस शीट की दक्षता को बेहतर बनाने की दिशा में एक अहम संकेत है। हालांकि, इसका असर तुरंत तिमाही नतीजों पर शायद न दिखे, लेकिन लंबे समय में यह कमोडिटी ट्रेडिंग और सस्ते फंड जुटाने की दिशा में एक बड़ी तैयारी है। आने वाले समय में निवेशकों की नजर इस बात पर होनी चाहिए कि ये इकाइयां कितनी तेजी से खनिज अधिग्रहण शुरू करती हैं और फाइनेंसिंग लागत में कितनी बचत कर पाती हैं।
