National Land Monetization Corporation (NLMC) ने सरकारी कंपनियों (CPSEs) की बेकार पड़ी जमीन और संपत्तियों को बेचकर **₹5,000 करोड़** से ज्यादा जुटाने की मंजूरी दे दी है। इस कदम से सरकारी कंपनियों की बैलेंस शीट और एक्सपेंशन प्लान में बड़ा बदलाव आ सकता है।
संपत्तियों से कैसे खुलेगा खजाना?
सरकारी कंपनियों (CPSEs) के पास दशकों पुरानी ऐसी जमीनें और बिल्डिंग्स पड़ी हैं, जो फिलहाल किसी काम की नहीं हैं। NLMC अब एक टेक्निकल पार्टनर की तरह काम करते हुए इनका सही मार्केट वैल्यूएशन करेगी। इसमें ड्यू डिलिजेंस और लैंड रिकॉर्ड वेरिफिकेशन जैसे जटिल काम शामिल होंगे, ताकि सरकारी खजाने को इन संपत्तियों का पूरा दाम मिल सके।
निवेशकों के लिए क्यों है यह जरूरी?
भले ही अभी यह खुलासा नहीं हुआ है कि किन संपत्तियों को बेचा जाएगा, लेकिन यह खबर सरकारी कंपनियों के शेयरधारकों के लिए पॉजिटिव हो सकती है। जमीन बेचने से जो पैसा आएगा, उसका इस्तेमाल कर्ज घटाने, नई कैपिटल एक्सपेंडिचर या फिर डिविडेंड/बायबैक के जरिए निवेशकों को फायदा देने में किया जा सकता है।
हालांकि, भारत में लैंड मोनेटाइजेशन का रास्ता आसान नहीं है। इसमें अक्सर कानूनी पचड़े, जोनिंग रेगुलेशंस और स्थानीय नगर पालिकाओं की मंजूरी में देरी होती है। बाजार की नजरें अब इस पर होंगी कि NLMC इस कागजी मंजूरी को जमीन पर असल ट्रांजेक्शन में कितनी तेजी से बदल पाती है।
आगे की राह
NLMC ने 2025-26 फाइनेंशियल ईयर के फाइनेंशियल स्टेटमेंट्स को भी मंजूरी दे दी है। सरकार का स्पष्ट लक्ष्य है कि खाली पड़ी जमीनों को अर्थव्यवस्था का हिस्सा बनाकर इंफ्रास्ट्रक्चर को गति दी जाए। अब निवेशकों को यह देखना होगा कि कौन सी सरकारी कंपनियां इस प्रक्रिया से सबसे पहले फायदा उठाती हैं और उनका कैश फ्लो कैसे सुधरता है।
