NITI Aayog Report: ग्रेजुएट्स की बेरोजगारी दर **13%** पहुंची, इकोनॉमी के लिए बड़ा रिस्क

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AuthorAditi Chauhan|Published at:
NITI Aayog Report: ग्रेजुएट्स की बेरोजगारी दर **13%** पहुंची, इकोनॉमी के लिए बड़ा रिस्क

NITI Aayog की नई रिपोर्ट ने भारतीय जॉब मार्केट पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। ग्रेजुएट्स की बेरोजगारी दर **13%** तक पहुंच गई है, जो राष्ट्रीय औसत **3.2%** से काफी ज्यादा है। केवल **8.25%** ग्रेजुएट्स को ही उनकी योग्यता के अनुसार काम मिल पा रहा है।

NITI Aayog की हालिया रिपोर्ट 'Reimagining Skilling for Viksit Bharat@2047' ने इस बात को उजागर किया है कि भारत की हायर एजुकेशन और मॉडर्न जॉब मार्केट की जरूरत के बीच एक बड़ी खाई पैदा हो गई है। रिपोर्ट के मुताबिक, महिलाओं के लिए स्थिति और भी चुनौतीपूर्ण है, जहां बेरोजगारी दर 20.4% के ऊंचे स्तर पर है।

जेनेरिक डिग्री का संकट

रिपोर्ट में बताया गया है कि देश में BA, BSc और BCom जैसी जेनेरिक डिग्रियों में 2 करोड़ से ज्यादा छात्र एनरोल्ड हैं। समस्या यह है कि इन डिग्रियों में व्यावहारिक ट्रेनिंग (Practical Training) की कमी है। इस वजह से कंपनियों को फ्रेश ग्रेजुएट्स को हायर करने के बाद उन्हें दोबारा ट्रेन करने पर भारी खर्च करना पड़ता है, जिससे कंपनियों की हायरिंग कॉस्ट बढ़ जाती है और प्रोडक्टिविटी पर असर पड़ता है।

लॉन्ग-टर्म इकोनॉमिक रिस्क

मैन्युफैक्चरिंग और टेक्नोलॉजी जैसे तेजी से बढ़ने वाले सेक्टर्स को तकनीकी रूप से स्किल्ड वर्कफोर्स की जरूरत है, जिसे वर्तमान एजुकेशन सिस्टम पूरा नहीं कर पा रहा है। यदि शिक्षा प्रणाली में बदलाव नहीं किया गया, तो भारत का डेमोग्राफिक डिविडेंड (Demographic Dividend) आर्थिक विकास में पूरी तरह से योगदान नहीं दे पाएगा।

आगे क्या होगा?

NITI Aayog ने सुझाव दिया है कि यूनिवर्सिटी के करिकुलम का रेगुलर ऑडिट हो और पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप को बढ़ावा दिया जाए। अब बाजार की नजर इस बात पर है कि सरकार वोकेशनल इंफ्रास्ट्रक्चर और एजुकेशन पॉलिसी में किस तरह के बड़े सुधार लाती है ताकि स्किल्स और जॉब्स के बीच के इस फासले को कम किया जा सके।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.