छोटे कारोबारियों के लिए आसान होगा लोन लेना! NITI Aayog ने लेंडर्स से UPI ट्रांजैक्शन डेटा का इस्तेमाल करने की अपील की है। इसका मकसद भारत में क्रेडिट-टू-GDP रेशियो को बढ़ाकर MSMEs के लिए फंड की कमी को दूर करना है।
ग्लोबल फिनटेक फेस्ट 2026 में NITI Aayog के वाइस-चेयरमैन डॉ. अशोक कुमार लाहिड़ी ने साफ कहा कि भारत को अपनी अर्थव्यवस्था की बड़ी बाधा यानी छोटे व्यवसायों के लिए लोन की कमी को दूर करने के लिए डिजिटल टूल्स का सहारा लेना होगा। फिलहाल भारत का क्रेडिट-टू-GDP रेशियो 53% से 55% के बीच है, जो विकसित देशों के 150% से 170% के मुकाबले काफी कम है।
UPI और ULI का नया मॉडल
नया प्रस्ताव Unified Payments Interface (UPI) और Unified Lending Interface (ULI) के डेटा के उपयोग पर केंद्रित है। अभी तक बैंक लोन देने के लिए मुख्य रूप से फिजिकल प्रॉपर्टी जैसी कोलैटरल (Collateral) पर निर्भर रहते हैं, जिससे वे छोटे लेकिन भरोसेमंद कारोबारी छूट जाते हैं जिनके पास बड़ी संपत्ति नहीं है लेकिन रोजमर्रा की अच्छी बिक्री है। अब कैश-फ्लो आधारित असेसमेंट से बैंकों को छोटे व्यवसायों की सही आर्थिक सेहत समझने में मदद मिलेगी, जिससे बैड लोन का खतरा भी घटेगा।
मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर को रफ्तार
यह बदलाव सरकार के मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर को बड़ा बनाने के लक्ष्य का हिस्सा है। फिलहाल इन्वेस्टमेंट-टू-GDP रेशियो 30% से 34% के दायरे में है, जिसे बढ़ाने के लिए केमिकल्स, टेक्सटाइल, टेलीकॉम इक्विपमेंट और सोलर PV मैन्युफैक्चरिंग जैसे सेक्टर पर जोर दिया जा रहा है। हालांकि, ग्लोबल ट्रेड बैरियर और राज्यों के बढ़ते कर्ज जैसे चैलेंज भी सामने हैं, जिन पर सरकार की नजर बनी हुई है।
