NITI Aayog ने शहरों के बेहतर प्रबंधन के लिए सीधे तौर पर मेयर चुनने और उन्हें **5 साल** का कार्यकाल देने की सिफारिश की है। इस बड़े रिफॉर्म से शहरों को अधिक वित्तीय और प्रशासनिक ताकत मिलेगी, जो इंफ्रास्ट्रक्चर और म्यूनिसिपल फाइनेंसिंग सेक्टर के लिए नए अवसर खोल सकता है।
गवर्नेंस में बड़े बदलाव की तैयारी
भारत के प्रमुख थिंक टैंक, NITI Aayog ने 'मूविंग टुवर्ड्स इफेक्टिव सिटी गवर्नमेंट' नाम का एक फ्रेमवर्क पेश किया है। अभी की व्यवस्था में शहरों के फैसले अक्सर राज्य सरकार द्वारा नियुक्त कमिश्नर लेते हैं, जिससे स्थानीय निकायों के पास अधिकार कम होते हैं। नए प्रस्ताव के तहत 'मेयर-इन-काउंसिल' सिस्टम को लागू करने की बात कही गई है, जिससे मेयर और उनकी काउंसिल के पास बजट और विकास कार्यों को लेकर ज्यादा पावर होगी।
इन्फ्रा और म्यूनिसिपल बॉन्ड पर असर
बाजार के नजरिए से देखें, तो यह रिफॉर्म गेम-चेंजर साबित हो सकता है। जब शहरों के पास अपना बजट मैनेज करने की आजादी होगी, तो वेस्ट मैनेजमेंट, पब्लिक ट्रांसपोर्ट और वाटर सप्लाई जैसे बड़े प्रोजेक्ट्स में तेजी आएगी। इसके साथ ही, बेहतर गवर्नेंस म्यूनिसिपल बॉन्ड मार्केट को भी मजबूत करेगी। यदि शहर अपने स्तर पर राजस्व जुटा पाएंगे, तो उनकी क्रेडिट रेटिंग सुधरेगी, जिससे वे आसानी से डेट मार्केट से फंड जुटा सकेंगे।
लागू करने की चुनौतियां
हालांकि, यह राह आसान नहीं है। अर्बन गवर्नेंस एक 'स्टेट सब्जेक्ट' है और राज्य सरकारें अक्सर अपने अधिकार छोड़ने में हिचकिचाती हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि राज्यों का सहयोग और म्यूनिसिपल बॉडीज की अकाउंटिंग क्षमता का आधुनिकीकरण इस बदलाव की सफलता के लिए सबसे बड़ी कड़ी है। निवेशक अब इस बात पर नजर रख रहे हैं कि कौन से राज्य 74वें संविधान संशोधन के तहत 18 महत्वपूर्ण कार्य स्थानीय निकायों को सौंपने की पहल करते हैं।
