NDA के सहयोगियों के बीच Election Commission को लेकर बढ़ती खींचतान और ओडिशा में Mines and Minerals Amendment Act के खिलाफ विरोध प्रदर्शन से पॉलिसी में देरी की चिंता पैदा हो गई है।
गठबंधन में बढ़ती खींचतान
नेशनल डेमोक्रेटिक अलायंस (NDA) के भीतर 2023 के इलेक्शन कमिश्नर एक्ट को लेकर सहयोगियों का स्टैंड बदल रहा है। मार्केट अब इस बात पर नजर रखे हुए है कि क्या यह आंतरिक मतभेद किसी बड़े विधायी गतिरोध (Legislative gridlock) को जन्म देगा, जिससे आर्थिक सुधारों और पॉलिसी निरंतरता पर असर पड़ सकता है।
ओडिशा माइनिंग सेक्टर पर संकट
दूसरी तरफ, ओडिशा में हालात और भी पेचीदा हो गए हैं। Biju Janata Dal (BJD) द्वारा 'माइन्स एंड मिनरल्स डेवलपमेंट एंड रेगुलेशन अमेंडमेंट एक्ट' के खिलाफ किए जा रहे विरोध ने राज्य की विधानसभा की कार्यवाही को बाधित कर दिया है। ओडिशा भारत के लिए आयरन ओर और कोल का बड़ा हब है। केंद्र और राज्य के बीच खनिज नीति को लेकर टकराव से उन माइनिंग और स्टील कंपनियों की चिंता बढ़ गई है, जो अपनी भविष्य की योजनाओं के लिए स्पष्ट रेगुलेशन पर निर्भर हैं।
निवेशकों के लिए क्या है रिस्क?
माइनिंग जैसे कैपिटल-इंटेंसिव सेक्टर के लिए पॉलिसी स्टेबिलिटी सबसे जरूरी है। जब केंद्र और राज्य के बीच टकराव होता है, तो लीज रिन्यूअल, एनवायरमेंटल क्लीयरेंस और ऑपरेशनल परमिट मिलने में देरी हो सकती है। यदि यह गतिरोध जारी रहता है, तो ओडिशा में काम करने वाली कंपनियों के प्रोडक्शन शेड्यूल पर दबाव बनना तय है। निवेशक अब संसद के आगामी सत्रों और माइनिंग पॉलिसी से जुड़े अपडेट्स पर पैनी नजर बनाए हुए हैं, ताकि यह पता चल सके कि औद्योगिक गतिविधियों पर इसका कितना गहरा असर पड़ेगा।
