NDA की सहयोगी पार्टी PMK के अध्यक्ष अंबुमणि रामदास ने नेशनल कास्ट सेंसस (Caste Census) की प्रक्रिया पर आपत्ति जताई है। उन्होंने मैनुअल डेटा एंट्री के तरीके को डेटा की शुद्धता के लिए खतरा बताया है।
डेटा एंट्री में क्या है दिक्कत?
एनडीए (NDA) की सहयोगी पार्टी पट्टली मक्कल काची (PMK) के अध्यक्ष अंबुमणि रामदास ने केंद्र सरकार के उस फैसले का विरोध किया है, जिसमें जनगणना करने वालों को जातियों के नाम मैनुअल टाइप करने की छूट दी गई है। पीएमके का मानना है कि ड्रॉप-डाउन मेन्यू के बजाय खुली मैनुअल एंट्री से 4,147 मान्य जातियों के डेटा में भारी विसंगतियां आ सकती हैं।
डेटा फ्रैगमेंटेशन का खतरा
विशेषज्ञों का कहना है कि अलग-अलग क्षेत्रीय बोलियों और स्पेलिंग के कारण मैनुअल एंट्री सिस्टम लाखों की संख्या में फर्जी या डुप्लिकेट एंट्री बना सकता है। इससे डेटा का विश्लेषण करना नामुमकिन हो जाएगा, जिसका सीधा असर भविष्य की आरक्षण नीतियों और वेलफेयर स्कीमों (Welfare Schemes) पर पड़ेगा।
क्या मांग कर रही है PMK?
पीएमके का सुझाव है कि बिहार और तेलंगाना की तर्ज पर एक स्टैंडर्डाइज्ड डेटाबेस का उपयोग किया जाए। सरकार को पहले से तय लिस्ट को ड्रॉप-डाउन मेन्यू में शामिल करना चाहिए ताकि डेटा की सटीकता बनी रहे। इस मांग को इंडियन नेशनल कांग्रेस (Indian National Congress) का भी समर्थन मिला है, जिससे सरकार पर दबाव बढ़ गया है।
आने वाले महीनों में जनगणना की प्रक्रिया अपने पीक पर होगी, ऐसे में सरकार सॉफ्टवेयर में बदलाव करेगी या नहीं, इस पर निवेशकों और आम लोगों की नजरें टिकी हुई हैं।
