Parental Leave Reforms: NCW के 37 नए प्रस्ताव, इंडिया इंक की HR पॉलिसी में होगा बड़ा बदलाव!

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AuthorAditi Chauhan|Published at:
Parental Leave Reforms: NCW के 37 नए प्रस्ताव, इंडिया इंक की HR पॉलिसी में होगा बड़ा बदलाव!

National Commission for Women (NCW) ने पेरेंटल लीव को लेकर **37** बड़े सुधारों का प्रस्ताव रखा है। इसमें जेंडर-न्यूट्रल चाइल्डकेयर लीव और अनिवार्य पैटरनिटी लीव शामिल हैं। अगर यह लागू होता है, तो प्राइवेट कंपनियों और गिग प्लेटफॉर्म्स के लिए कंप्लायंस और ऑपरेशनल खर्च बढ़ सकते हैं।

National Commission for Women (NCW) ने केंद्र सरकार के सामने 37 सिफारिशों का एक विस्तृत खाका पेश किया है। इसका मुख्य मकसद भारत में मैटरनिटी, पैटरनिटी और चाइल्डकेयर से जुड़े बेनिफिट्स को आधुनिक और एकसमान बनाना है। यह बदलाव प्राइवेट सेक्टर और तेजी से बढ़ते गिग इकॉनमी के कामकाज के तरीके को पूरी तरह बदल सकते हैं।

क्या है प्रपोजल का कोर?

इस प्रस्ताव में सबसे अहम बदलाव 'जेंडर-न्यूट्रल' लीव स्ट्रक्चर है। NCW ने सुझाव दिया है कि 730 दिनों की चाइल्डकेयर लीव को माता-पिता आपस में बांट सकें। साथ ही, अब पैटरनिटी लीव को भी अनिवार्य बनाने पर जोर दिया जा रहा है। अगर ये नियम कानून बन जाते हैं, तो इंडिया इंक को अपनी HR पॉलिसी और स्टाफिंग प्लानिंग में बड़े फेरबदल करने होंगे, जिससे कंपनियों पर खर्च का बोझ भी बढ़ सकता है।

चाइल्डकेयर और सोशल सिक्योरिटी पर असर

आयोग ने 'National Childcare Infrastructure Mission' के तहत साल 2030 तक 5 लाख क्रेश सीट्स बनाने का लक्ष्य रखा है। NCW ने इन बदलावों को 'Code on Social Security, 2020' में जोड़ने की सलाह दी है। कंपनियों के लिए इसका मतलब है कि उन्हें ऑन-साइट क्रेश की सुविधा देनी पड़ सकती है या सरकारी चाइल्डकेयर फंड्स में योगदान करना होगा।

गिग वर्कर्स के लिए सुरक्षा का दायरा

NCW का एक बड़ा फोकस गिग और प्लेटफॉर्म वर्कर्स को सोशल सिक्योरिटी के दायरे में लाना है। वर्तमान में जो वर्कर फॉर्मल एंप्लॉयमेंट से बाहर हैं, उन्हें कानूनी सुरक्षा मिलने से प्लेटफॉर्म कंपनियों की कंप्लायंस लागत में भारी इजाफा हो सकता है। फिलहाल ये सिर्फ सिफारिशें हैं और Ministry of Labour, Ministry of Women and Child Development समेत अन्य विभागों के पास विचाराधीन हैं। इन पर अंतिम फैसला सरकार के रुख और कानूनी ड्राफ्ट पर निर्भर करेगा, जिस पर पूरे कॉरपोरेट जगत की नजरें टिकी हैं।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.