सरकार ने NCDC Amendment Bill 2026 पेश किया है, जो देश के को-ऑपरेटिव सेक्टर की फंडिंग का तरीका पूरी तरह बदल देगा। अब NCDC सीधे इक्विटी (Equity) में निवेश करने के साथ-साथ टेक और लॉजिस्टिक्स कंपनियों को भी फंड दे सकेगा।
फंडिंग का दायरा बढ़ा
वर्ष 1962 से चले आ रहे नेशनल कोऑपरेटिव डेवलपमेंट कॉरपोरेशन (NCDC) के कामकाज में बदलाव की तैयारी है। अभी तक NCDC केवल रजिस्टर्ड कोऑपरेटिव सोसायटियों को लोन (Debt) देता था, लेकिन नए बिल के तहत अब इसका दायरा उन प्राइवेट कंपनियों तक बढ़ जाएगा जो इस क्षेत्र के साथ काम कर रही हैं। इसमें एग्री-टेक स्टार्टअप्स, लॉजिस्टिक्स और कोल्ड चेन जैसी कंपनियां शामिल हो सकेंगी, जिससे रूरल सप्लाई चेन की बाधाएं दूर होंगी।
इक्विटी निवेश और रिस्क
यह बिल एक बड़ा कदम इसलिए है क्योंकि अब NCDC वेंचर्स में सीधे इक्विटी हिस्सेदारी ले सकेगा। पारंपरिक लोन के मुकाबले, इक्विटी में निवेश करने से NCDC सीधे तौर पर बिजनेस रिस्क का हिस्सा बन जाएगा। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे पब्लिक फंड के डूबने का खतरा बढ़ सकता है, इसलिए NCDC को ड्यू डिलिजेंस और एग्जिट स्ट्रैटेजी पर बहुत सख्त होना पड़ेगा।
RBI के साथ तालमेल
पारदर्शिता लाने के लिए, NCDC अब अपनी क्रेडिट डेटा को सीधे भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के साथ साझा करेगा। अब तक को-ऑपरेटिव सेक्टर में उधार लेने वालों का डेटा सीमित होता था, जिससे लोन रिकवरी में दिक्कतें आती थीं। RBI के मानकों के साथ जुड़ने से लोन अप्रैजल प्रोसेस बेहतर होगा और बड़ी वित्तीय संस्थाओं जैसा अनुशासन आ सकेगा।
छोटे सदस्यों का क्या होगा?
इस बदलाव पर चिंता भी जताई जा रही है कि कहीं बड़े कमर्शियल प्रोजेक्ट्स को फंड देने के चक्कर में 'प्राइमरी एग्रीकल्चरल कोऑपरेटिव क्रेडिट सोसायटियों' को मिलने वाला पैसा कम न हो जाए। इसे रोकने के लिए सरकार 'को-ऑपरेटिव-बेनिफिट टेस्ट' लाने की योजना बना रही है, ताकि विकास का मुख्य लक्ष्य छोटे स्तर के सदस्यों का कल्याण ही बना रहे।
