Morgan Stanley के Ridham Desai का भरोसा, FIIs की भारी बिकवाली के बावजूद भारतीय बाजार मजबूत

ECONOMY
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AuthorAditi Chauhan|Published at:
Morgan Stanley के Ridham Desai का भरोसा, FIIs की भारी बिकवाली के बावजूद भारतीय बाजार मजबूत

Morgan Stanley के India MD Ridham Desai ने भारतीय इक्विटी पर अपना भरोसा बरकरार रखा है। उनका मानना है कि देश की इकोनॉमी की मजबूती FIIs की रिकॉर्ड बिकवाली के खिलाफ एक ढाल का काम कर रही है, जहां SIPs के जरिए आ रहा घरेलू पैसा बाजार को सहारा दे रहा है।

पिछले कुछ महीनों में विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) की ओर से हुई भारी बिकवाली के बावजूद मार्केट एक्सपर्ट्स का मानना है कि भारतीय बाजार की लंबी अवधि की कहानी अभी भी बरकरार है। Morgan Stanley India के मैनेजिंग डायरेक्टर Ridham Desai ने हाल ही में साफ किया है कि भले ही विदेशी सेंटीमेंट निचले स्तर पर हो, लेकिन भारत की इकोनॉमिक संरचना में वह दम है जो कई उभरते बाजारों (Emerging Markets) में फिलहाल गायब है। यही कारण है कि सिस्टमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान्स (SIPs) के जरिए आ रहा घरेलू पैसा बिकवाली के दबाव को बखूबी सोख रहा है।

ग्लोबल मार्केट से तुलना

एक्सपर्ट्स अक्सर भारत की तुलना दक्षिण कोरिया, ब्राजील और चीन जैसे देशों से करते हैं। उदाहरण के तौर पर, दक्षिण कोरिया में AI-सेक्टर के खर्च से आई तेजी के बाद मार्केट में 35% का बड़ा करेक्शन और विदेशी लिक्विडेशन देखा गया। इसके विपरीत, भारत का ग्रोथ प्रोफाइल ज्यादा डायवर्सिफाइड है, जिसे ग्लोबल फंड मैनेजर्स पूरी तरह नजरअंदाज नहीं कर पा रहे हैं।

इन्वेस्टमेंट और सेविंग्स का अंतर

इकोनॉमिस्ट्स के अनुसार, भारत की एक बड़ी चुनौती इन्वेस्टमेंट और सेविंग्स का गैप है। वर्तमान में भारत की इन्वेस्टमेंट रेट करीब 31.5% है, जबकि घरेलू सेविंग्स 28% से 30% के बीच रहती है। विकास के लिए हम अपनी बचत से ज्यादा खर्च कर रहे हैं, इसलिए विदेशी पूंजी का प्रवाह बना रहना जरूरी है।

क्या कहते हैं प्रशांत जैन?

3P Investment Managers के फाउंडर प्रशांत जैन का कहना है कि हालिया मार्केट परफॉर्मेंस ग्लोबल सेंटीमेंट से ज्यादा आंतरिक मजबूती का संकेत है। पिछले दो सालों में हुआ करेक्शन एक जरूरी कंसोलिडेशन है, क्योंकि उस दौरान भारतीय शेयर अपने वैश्विक साथियों की तुलना में महंगे (Higher Valuations) ट्रेड कर रहे थे। अब यह स्थिति केवल वैल्युएशन के संतुलन की है। निवेशकों को आने वाली तिमाहियों में विदेशी लिक्विडिटी और घरेलू खरीदारी के बीच के संतुलन पर नजर रखनी चाहिए, क्योंकि यही शॉर्ट-टर्म मार्केट मूवमेंट तय करेगा।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.