बंगाल की खाड़ी में बने कम दबाव के क्षेत्र के कारण भारी बारिश का अलर्ट जारी किया गया है, जिससे फसलों को नुकसान का खतरा बढ़ गया है। यह मौसम की अनिश्चितता रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) की आगामी पॉलिसी मीटिंग के लिए एक बड़ी चुनौती बन गई है।
भारत में मानसून की वापसी शुरू हो चुकी है, लेकिन यह अपने तय समय से करीब 2 दिन पीछे चल रही है। राहत की उम्मीद के बीच बंगाल की खाड़ी में बना नया लो-प्रेशर सिस्टम साउथ पेनिनसुला और ईस्ट इंडिया के लिए नई मुसीबत लेकर आया है। देश में पहले से ही बारिश की 15% कमी है, और साउथ पेनिनसुला में तो यह आंकड़ा 28% तक पहुंच चुका है।
किसानों के लिए दोधारी तलवार
खेतों में खड़ी सोयाबीन, दालें और कपास की फसल को इस समय नमी की जरूरत है, लेकिन तेज तूफान का खतरा फसल को बर्बाद भी कर सकता है। भारी बारिश से वाटर-लॉगिंग की स्थिति बन सकती है, जिससे तैयार फसल को भारी नुकसान हो सकता है। यदि फसलें खराब हुईं, तो सप्लाई चेन बाधित होगी और फूड इन्फ्लेशन में उछाल आना तय है।
RBI के सामने नई चुनौती
रिजर्व बैंक की मॉनेटरी पॉलिसी कमिटी (MPC) की बैठक 5 अक्टूबर से 7 अक्टूबर के बीच होनी है। पेच यह है कि सितंबर महीने का आधिकारिक इन्फ्लेशन डेटा 12 अक्टूबर को आएगा। ऐसे में बिना ताजा आंकड़ों के, सेंट्रल बैंक को जलाशयों के स्तर और फसल की स्थिति जैसे इंडिकेटर्स पर निर्भर रहना पड़ रहा है।
इन्वेस्टर्स की नजर अब पूरी तरह से फसल के नुकसान की खबरों पर टिकी है। अगर सप्लाई साइड पर दबाव बढ़ता है, तो महंगाई को काबू में रखने के लिए RBI के फैसलों में सख्त रुख देखने को मिल सकता है।
