मानसून का कमाल: जुलाई में झमाझम बारिश से खरीफ बुवाई तेज, पर मंडरा रहे हैं खतरे!

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AuthorSaanvi Reddy|Published at:
मानसून का कमाल: जुलाई में झमाझम बारिश से खरीफ बुवाई तेज, पर मंडरा रहे हैं खतरे!

मानसून की जुलाई में जोरदार वापसी हुई है, जिसने खरीफ फसलों की बुवाई को सहारा दिया है। सीजन का रेनफॉल डेफिसिट 35% से घटकर 12% रह गया है। हालांकि, अगस्त और सितंबर के लिए सामान्य से कम बारिश का अनुमान चिंता बढ़ा रहा है, जो फसलों की पैदावार को प्रभावित कर सकता है।

जुलाई में मॉनसून की वापसी

मानसून की जुलाई में शानदार वापसी हुई है, जिसने सूखे शुरुआती सीजन के बाद कृषि गतिविधियों को नई जान फूंकी है। भारतीय मौसम विभाग (IMD) के आंकड़ों के अनुसार, जुलाई में सामान्य से 1% ज्यादा बारिश दर्ज की गई। इस बेहतरीन प्रदर्शन की बदौलत, जून के अंत तक जहां बारिश में 35% की कमी थी, वह जुलाई के अंत तक घटकर करीब 12% रह गई।

खरीफ बुवाई पर असर

खासकर मध्य भारत में, जहां बारिश की कमी 50% से बढ़कर 5% से ज्यादा हो गई, इस बेहतर मौसम ने किसानों को खरीफ फसलों की बुवाई में तेजी लाने में मदद की है। जुलाई के आखिर तक, कुल बुवाई में पिछले साल के मुकाबले सिर्फ 4.7% की कमी रह गई थी, जो जून में दर्ज 23% की बड़ी गिरावट से काफी बेहतर है। धान, मक्का, दलहन, तिलहन और कपास जैसी महत्वपूर्ण फसलों की बुवाई में इस mid-season wet spell के चलते सुधार देखा गया है।

अगस्त और सितंबर का अनुमान

जुलाई की राहत के बावजूद, मॉनसून सीजन के बाकी बचे महीनों के लिए अनुमान सतर्कता भरा है। भारतीय मौसम विभाग का अनुमान है कि अगस्त और सितंबर में देश भर में सामान्य से 94% से कम बारिश हो सकती है। अगस्त का महीना मॉनसून की कुल बारिश का लगभग 30% होता है, इसलिए इस दौरान किसी भी संभावित कमी का असर फसल के विकास पर पड़ सकता है। नोमुरा (Nomura) और स्काईमेट (Skymet) जैसी एजेंसियों ने भी चेतावनी दी है कि सामान्य से कम बारिश, खासकर देर से बोई गई फसलों पर बुरा असर डाल सकती है, जिससे कुल पैदावार प्रभावित हो सकती है।

खाद्य सुरक्षा और आर्थिक संकेत

निवेशकों के नजरिए से देखें तो, भारत की मौजूदा खाद्य सुरक्षा स्थिति मौसम संबंधी अनिश्चितताओं के खिलाफ एक ढाल का काम कर रही है। सरकार के पास धान और गेहूं का भंडार (stock) आधिकारिक बफर जरूरतों से काफी ज्यादा है, जो संभावित मूल्य वृद्धि (price shocks) से सुरक्षा प्रदान करता है। इसके अलावा, दलहन का भंडार भी करीब 40 लाख टन (जिसमें 20 लाख टन चना शामिल है) अनुमानित है, जो सप्लाई से जुड़े जोखिमों को कम करने में मदद करता है। कृषि मंत्रालय एल नीनो (El Niño) की स्थिति पर भी नजर बनाए हुए है, जो मध्यम स्तर पर पहुंच गया है, ताकि कृषि उत्पादन पर किसी भी अतिरिक्त दबाव का आकलन किया जा सके।

निवेशक आने वाले खाद्य महंगाई (food inflation) के आंकड़ों पर नजर रख सकते हैं, क्योंकि मॉनसून को लेकर लगातार चिंताएं कमोडिटी की कीमतों और ग्रामीण मांग के रुझान को प्रभावित कर सकती हैं। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि अगस्त में होने वाली बारिश का वितरण और मात्रा ही फसल की अंतिम स्थिति तय करेगी और कृषि इनपुट कंपनियों, ग्रामीण क्षेत्रों में पैठ रखने वाली कंज्यूमर गुड्स फर्मों और व्यापक खाद्य महंगाई पर इसके संभावित असर को निर्धारित करेगी।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.