प्रधानमंत्री Narendra Modi और वित्त मंत्री Nirmala Sitharaman ने 2027 Union Budget की तैयारी के लिए एक हाई-लेवल बैठक की। बाजार में जारी ग्लोबल अस्थिरता और विदेशी निवेशकों की निकासी के चलते इंडेक्स में **12%** की गिरावट आई है, जिसे लेकर सरकार अब नई रणनीति तैयार कर रही है।
आर्थिक रोडमैप पर मंथन
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 21 अक्टूबर को घरेलू अर्थव्यवस्था की स्थिति की समीक्षा के लिए एक उच्च-स्तरीय बैठक की। इसमें वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण और आर्थिक सलाहकार परिषद के सदस्य शामिल हुए। इस बैठक का मुख्य केंद्र आगामी 2027 Union Budget के लिए एक मजबूत रोडमैप तैयार करना था, ताकि भारतीय बाजार को वैश्विक वित्तीय झटकों से बचाया जा सके और विदेशी निवेश को फिर से आकर्षित किया जा सके।
बाजार पर दबाव क्यों?
इस साल भारतीय इक्विटी मार्केट को काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ा है। विदेशी निवेशकों (FIIs) की लगातार बिकवाली और भू-राजनीतिक तनाव (Geopolitical Tensions) के कारण इंडेक्स अब तक 12% तक गिर चुके हैं। सरकार की मौजूदा प्राथमिकता इन बाहरी दबावों को कम करने और घरेलू माहौल को स्थिर करने की है।
बजट में कैसा होगा फोकस?
सरकार इस बार 'फिस्कल प्रूडेंस' (Fiscal Prudence) और विकास के बीच संतुलन बनाने की कोशिश कर रही है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बार-बार भारत की रेजिलिएंस पर जोर दिया है, लेकिन खर्चों को लेकर सरकार बेहद सतर्क है। प्रशासनिक खर्चों की बारीकी से निगरानी की जा रही है, जिसका मतलब है कि आने वाले बजट में व्यापक खर्चों के बजाय 'टारगेटेड एलोकेशन' पर ज्यादा ध्यान दिया जा सकता है।
महंगाई और मॉनेटरी पॉलिसी की चुनौती
अर्थव्यवस्था के लिए महंगाई एक बड़ी चुनौती बनी हुई है। मॉनेटरी पॉलिसी कमेटी (MPC) सप्लाई-साइड इन्फ्लेशन को लेकर चिंतित है। इनपुट कॉस्ट बढ़ने के कारण कंपनियों के प्रॉफिट मार्जिन पर दबाव दिख रहा है, खासकर उन व्यवसायों के लिए जो लागत का बोझ सीधे ग्राहकों पर नहीं डाल सकते। आने वाले महीनों में निवेशकों की नजर इस बात पर होगी कि ब्याज दरों और सरकारी खर्चों को लेकर क्या नए निर्देश आते हैं, जो बाजार की अगली दिशा तय करेंगे।
