प्रधानमंत्री नरेंद्र Modi और रूसी राष्ट्रपति Vladimir Putin 11 सितंबर, 2026 को नई दिल्ली में BRICS समिट के दौरान मुलाकात करेंगे। बातचीत का केंद्र डिफेंस टेक्नोलॉजी ट्रांसफर और **$50 बिलियन** के ट्रेड डेफिसिट को कम करना होगा।
डिफेंस सेक्टर में हलचल
इस शिखर वार्ता में सबसे बड़ा मुद्दा डिफेंस टेक्नोलॉजी का होगा। चर्चा है कि दोनों देश Su-57 फिफ्थ-जेनरेशन फाइटर जेट और BrahMos मिसाइल प्रोग्राम को अपग्रेड करने पर बड़ा निर्णय ले सकते हैं। हाल ही में डिफेंस एक्विजिशन काउंसिल (DAC) ने ₹1.1 लाख करोड़ के सैन्य अधिग्रहण को मंजूरी दी है, जिससे Hindustan Aeronautics Limited और अन्य घरेलू डिफेंस कंपनियों पर निवेशकों की नजर बनी हुई है।
व्यापार घाटा और पेमेंट का गणित
भारत और रूस के बीच ट्रेड डेफिसिट $50 बिलियन के पार पहुंच गया है, जिसका मुख्य कारण कच्चे तेल का आयात है। दोनों नेता अब इस व्यापार असंतुलन को पाटने के लिए रास्ता तलाशेंगे। साथ ही, ब्रिक्स देशों के बीच 90% ट्रेड लोकल करेंसी में हो रहा है, जिसे और मजबूती देने पर जोर दिया जाएगा।
निवेशकों के लिए जोखिम और अवसर
निवेशकों को यह समझना होगा कि नॉन-डॉलर पेमेंट सिस्टम में रुपये के बैलेंस जमा होने से लिक्विडिटी पर दबाव पड़ सकता है। इसके अलावा, डिफेंस डील्स बेहद संवेदनशील होती हैं, जिनमें गोपनीयता के कारण प्रोजेक्ट की समय-सीमा में देरी संभव है। शेयरधारकों को इन एग्रीमेंट्स के आने वाले नतीजों और टेक्नोलॉजी ट्रांसफर की रफ्तार पर पैनी नजर रखनी चाहिए।
