प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने Bloomberg New Economy Forum में भारत की आर्थिक ताकत को रेखांकित किया। देश की **7.8%** जीडीपी ग्रोथ और **$700 बिलियन** से ज्यादा का विदेशी मुद्रा भंडार वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच भारत को एक सुरक्षित निवेश डेस्टिनेशन बनाता है।
आर्थिक मजबूती और निवेश का भरोसा
नई दिल्ली में आयोजित Bloomberg New Economy Forum में प्रधानमंत्री ने साफ किया कि भारत आज की बिखरी हुई वैश्विक अर्थव्यवस्था में एक 'स्टेबिलिटी एंकर' की तरह है। अप्रैल-जून तिमाही में 7.8% की जीडीपी वृद्धि और $700 बिलियन का रिकॉर्ड विदेशी मुद्रा भंडार यह साबित करता है कि भारतीय अर्थव्यवस्था किसी भी बड़े बाहरी झटके को सहने में सक्षम है।
रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) के लिए बड़ी राहत
निवेशकों के लिए इस आंकड़े का मतलब है 'वित्तीय सुरक्षा'। विदेशी मुद्रा भंडार का स्तर इतना ऊंचा होने से RBI के पास मुद्रा की अस्थिरता को रोकने के लिए एक बड़ा बफर (Buffer) मौजूद है। ग्लोबल क्रेडिट रेटिंग एजेंसियों और विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) के लिए यह संप्रभु स्वास्थ्य (Sovereign health) का एक बड़ा इंडिकेटर है, जो मुश्किल दौर में भी भारत में विदेशी पैसा आने का रास्ता साफ रखता है।
डिजिटल इंफ्रा और स्टार्टअप इकोसिस्टम
पीएम मोदी ने भारत के डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर की ताकत पर जोर दिया। देश में अब 2,50,000 से ज्यादा स्टार्टअप्स हो चुके हैं। यह बदलाव इस बात का संकेत है कि ग्रोथ अब सिर्फ बड़े मेट्रो शहरों तक सीमित नहीं है, जिसका सीधा फायदा रिटेल, फिनटेक और लॉजिस्टिक्स क्षेत्र की कंपनियों को मिल सकता है।
सावधानियां और आगे की राह
सब कुछ सकारात्मक होने के बावजूद निवेशकों को सतर्क रहना होगा। मौजूदा वैश्विक माहौल में भू-राजनीतिक तनाव, सप्लाई चेन में बाधा और एनर्जी की कीमतों में उतार-चढ़ाव जैसी चुनौतियां बनी हुई हैं। एक्सपर्ट्स का मानना है कि इस रफ्तार को बनाए रखने के लिए राजकोषीय अनुशासन (Fiscal discipline) बेहद जरूरी है। आने वाले समय में इन्फ्लेशन और ट्रेड बैलेंस जैसे हाई-फ्रीक्वेंसी डेटा पर बाजार की नजर बनी रहेगी, जो यह तय करेंगे कि भारतीय अर्थव्यवस्था वैश्विक चुनौतियों से कितना अलग रह पाती है।
