अगस्त 2026 के 'मूड ऑफ द नेशन' सर्वे में प्रधानमंत्री Narendra Modi की अप्रूवल रेटिंग घटकर **48.7%** रह गई है, जो जनवरी में **55%** थी। NDA भले ही बहुमत में है, लेकिन बेरोजगारी और महंगाई को लेकर निवेशकों की चिंताएं बढ़ गई हैं।
अगस्त 2026 में जारी 'मूड ऑफ द नेशन' सर्वे के आंकड़े बताते हैं कि प्रधानमंत्री Narendra Modi की अप्रूवल रेटिंग अगस्त 2024 के बाद पहली बार 50% के स्तर से नीचे आई है। जनवरी 2026 में यह 55% थी, जो अब फिसलकर 48.7% पर आ गई है। हालांकि, National Democratic Alliance (NDA) के पास अभी भी 326 सीटों के साथ आरामदायक बहुमत है, लेकिन यह आंकड़ा साल की शुरुआत में अनुमानित 352 सीटों से कम है।
मार्केट और पॉलिसी पर असर
भारतीय शेयर बाजार के लिए राजनीतिक स्थिरता का बड़ा महत्व है, क्योंकि यह पॉलिसी में निरंतरता और रिफॉर्म्स का संकेत देती है। अप्रूवल रेटिंग में गिरावट एक बदलते राजनीतिक माहौल को दर्शाती है, जिसे बाजार के बड़े खिलाड़ी बारीकी से देख रहे हैं ताकि सरकारी फैसलों में किसी भी तरह के बदलाव के जोखिम का अंदाजा लगाया जा सके।
जनता की चिंता और बजट का समीकरण
सर्वे में 67% लोगों ने भर्ती परीक्षाओं में निष्पक्षता को लेकर असंतोष जताया है। बेरोजगारी और महंगाई जैसे मुद्दे प्रमुख बने हुए हैं, जो भविष्य में सरकार की फिस्कल पॉलिसी को प्रभावित कर सकते हैं। निवेशकों के लिए यह इसलिए जरूरी है क्योंकि सरकार अब कल्याणकारी योजनाओं, डायरेक्ट कैश ट्रांसफर या रोजगार सृजन पर अपना खर्च बढ़ा सकती है, जिसका असर अलग-अलग सेक्टरों के शेयरों पर पड़ना तय है।
राजनीतिक परिदृश्य में नया चेहरा
सर्वे में एक बड़ा बदलाव यह भी दिखा कि तमिलनाडु के मुख्यमंत्री और Tamilaga Vettri Kazhagam (TVK) के नेता विजय पहली बार प्रधानमंत्री पद के टॉप-3 दावेदारों में शामिल हुए हैं। यह बढ़ती राजनीतिक प्रतिस्पर्धा का संकेत है। अब बाजार इस बात पर नजर रखेगा कि सरकार आर्थिक विकास और लोक-लुभावन उपायों के बीच संतुलन कैसे बनाती है। आगामी बजट सत्र और सरकारी खर्च के आंकड़ों से यह साफ हो जाएगा कि क्या सरकार अपनी प्राथमिकताओं में बदलाव करने जा रही है।
