सरकार की मोबाइल मैन्युफैक्चरिंग PLI स्कीम अब मुनाफे में बदल गई है। कंपनी को दिए गए **₹19,000 करोड़** के इंसेंटिव के मुकाबले सरकार को **₹25,000 करोड़** का सीधा टैक्स कलेक्शन मिला है।
स्कीम ने बदली तस्वीर
इलेक्ट्रॉनिक्स और IT मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक, मोबाइल मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में PLI स्कीम अब सरकार के लिए फायदे का सौदा साबित हुई है। कुल ₹19,000 करोड़ के इंसेंटिव्स बांटने के बाद, सरकार को ₹25,000 करोड़ का डायरेक्ट टैक्स मिला है। इसके अलावा, GST पूल में भी ₹3,000 करोड़ का योगदान मिला है।
रोजगार का बड़ा जरिया
यह स्कीम केवल टैक्स ही नहीं, बल्कि नौकरियों के मौके पैदा करने में भी सफल रही है। मोबाइल मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में अब 12 लाख से ज्यादा लोगों को रोजगार मिला है। अगर पूरे इलेक्ट्रॉनिक्स वर्टिकल की बात करें, तो यह आंकड़ा 25 लाख के पार पहुंच गया है।
अब आगे क्या? (New Phase)
सरकार अब ₹62,500 करोड़ की नई 'मोबाइल फोन मैन्युफैक्चरिंग स्कीम' की तैयारी कर रही है, जो 2026-27 से लेकर 2030-31 तक चलेगी। इसका लक्ष्य केवल असेंबली तक सीमित रहना नहीं, बल्कि भारत में ही कल-पुर्जे (Components) तैयार करना और लोकल वैल्यू एडिशन बढ़ाना है।
निवेशकों के लिए संकेत
नई स्कीम में 2.25% से 5% तक का इंसेंटिव मिलेगा। वहीं, जो कंपनियां R&D और लोकल सब-असेंबली पर फोकस करेंगी, उन्हें 1.5% का एक्स्ट्रा इंसेंटिव दिया जाएगा। जो कंपनियां इंपोर्ट पर निर्भरता कम करके खुद का हाई-टेक मैन्युफैक्चरिंग बेस बनाएंगी, भविष्य में उन्हीं कंपनियों के मार्जिन में मजबूती देखने को मिलेगी।
