India Cellular and Electronics Association (ICEA) ने वित्त मंत्रालय से मोबाइल फोन पर GST को मौजूदा **18%** से घटाकर **5%** करने की गुहार लगाई है। घरेलू शिपमेंट में **11%** की गिरावट और मेमोरी चिप की कीमतों में चार गुना उछाल के चलते बजट फोन महंगे हो गए हैं, जिससे 2G से स्मार्टफोन की ओर बढ़ने की रफ्तार थम गई है।
डिमांड में सुस्ती और बढ़ती लागत
इंडस्ट्री के दिग्गज अब मौजूदा टैक्स स्ट्रक्चर को नाकाफी मान रहे हैं। बजट स्मार्टफोन सेगमेंट, जो 2G यूजर बेस को 4G/5G में बदलने की पहली कड़ी है, भारी दबाव में है। अप्रैल-जून 2026 की तिमाही में मोबाइल शिपमेंट में 10% से 11% की गिरावट आई है, जो पिछले छह सालों में सबसे बड़ी गिरावट है। देश में मोबाइल मैन्युफैक्चरिंग और एक्सपोर्ट के मोर्चे पर हम आगे तो हैं, लेकिन घरेलू खपत कमजोर बनी हुई है।
क्यों महंगे हुए स्मार्टफोन?
सितंबर 2025 से मेमोरी चिप्स (DRAM और NAND) की लागत में चार गुना बढ़ोतरी हुई है। इसका मुख्य कारण AI डेटा सेंटर्स द्वारा मेमोरी की भारी मांग है, जिससे कंज्यूमर इलेक्ट्रॉनिक्स के लिए सप्लाई चेन प्रभावित हुई है। नतीजा यह रहा कि एंट्री-लेवल स्मार्टफोन की कीमतों में 35% से 45% तक का उछाल आया है। आज बाजार में ₹10,000 से कम कीमत वाले फोन की हिस्सेदारी घटकर 5% से भी कम रह गई है।
ग्रे मार्केट और सरकारी नजरिया
ICEA का मानना है कि 18% GST के कारण ग्रे मार्केट (अवैध बाजार) को बढ़ावा मिल रहा है। एसोसिएशन का तर्क है कि अगर टैक्स 5% किया जाता है, तो लोग अधिकृत रिटेल चैनल्स की ओर लौटेंगे। सरकार फिलहाल इस प्रस्ताव की समीक्षा कर रही है। निवेशकों के लिए चिंता का विषय कंपनियों के घटते मार्जिन और लगातार बनी हुई इनपुट कॉस्ट है। अब सबकी नजर वित्त मंत्रालय के अगले कदम पर है कि क्या वे रेवेन्यू नुकसान के डर को पीछे छोड़ते हुए सेल्स बढ़ाने के लिए टैक्स में राहत देंगे या नहीं।
