MoRTH का नया डिजिटल प्लान: अब Armed Forces को टोल पर नहीं मिलेगा गलत चालान

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AuthorKaran Malhotra|Published at:
MoRTH का नया डिजिटल प्लान: अब Armed Forces को टोल पर नहीं मिलेगा गलत चालान

सड़क परिवहन मंत्रालय (MoRTH) अब सशस्त्र बलों की टोल छूट को भारत के नए 'मल्टी-लेन फ्री फ्लो' (MLFF) सिस्टम से जोड़ने की तैयारी कर रहा है। FY2028 तक **1,150** टोल प्लाजा को बाधा-मुक्त बनाने के लक्ष्य के साथ, यह डिजिटल फ्रेमवर्क गलत ई-चालान की समस्या को खत्म करेगा।

सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय (MoRTH) अब एक ऐसे डिजिटल समाधान पर काम कर रहा है जो सेना के जवानों के लिए टोल छूट को भविष्य के 'मल्टी-लेन फ्री फ्लो' (MLFF) हाईवे नेटवर्क में एकीकृत करेगा। जैसे-जैसे भारत पुराने टोल प्लाजा को हटाकर एआई-आधारित (AI-driven) और ऑटोमैटिक नंबर प्लेट रिकग्निशन सिस्टम की तरफ बढ़ रहा है, तकनीकी खामियों के कारण रक्षा कर्मियों को गलत ई-चालान मिल रहे थे। सरकार अब इस पूरी प्रक्रिया को डिजिटल रूप देने की योजना बना रही है।

सरकार के सामने दो मुख्य विकल्प

अधिकारी फिलहाल दो बड़े विकल्पों पर विचार कर रहे हैं:

  • स्पेशलाइज्ड FASTags: ऐसे खास टैग्स जो टोल कटने की प्रक्रिया को ऑटोमैटिक रूप से ब्लॉक कर देंगे।
  • रीइम्बर्समेंट मॉडल: रक्षा मंत्रालय की ओर से हाईवे अथॉरिटी को टोल राशि का भुगतान किया जाना।

इस योजना का कुल सालाना खर्च ₹300 करोड़ से अधिक होने का अनुमान है, जिस पर अभी अंतर-मंत्रालयी चर्चा चल रही है।

इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए क्यों है जरूरी?

सरकार का लक्ष्य FY2028 के अंत तक देश के 1,150 टोल प्लाजा को MLFF सिस्टम के तहत लाना है। हाईवे प्रोजेक्ट्स लंबी अवधि के कॉन्ट्रैक्ट्स पर चलते हैं, जहां रेवेन्यू की सटीक अकाउंटिंग बहुत जरूरी है। इस डिजिटल बदलाव से प्रशासनिक विवाद कम होंगे और रेवेन्यू लीकेज पर भी रोक लगेगी। निवेशकों के लिए यह महत्वपूर्ण है क्योंकि यह मॉडल आगे चलकर अन्य टोल छूट श्रेणियों के लिए एक टेम्पलेट का काम करेगा।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.