केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान और जीतन राम मांझी के बीच SC/ST रिजर्वेशन के सब-क्लासिफिकेशन (sub-classification) को लेकर सार्वजनिक मतभेद उभर आए हैं। सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद शुरू हुई यह बहस राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बनी हुई है।
राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) के भीतर एक बड़ा सियासी टकराव सामने आया है। यह विवाद SC/ST आरक्षण में उप-वर्गीकरण यानी 'सब-क्लासिफिकेशन' और 'क्रीमी लेयर' लागू करने की मांग को लेकर छिड़ा है।
विवाद की जड़ क्या है?
विवाद की शुरुआत तब हुई जब जीतन राम मांझी की पार्टी 'हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा' (HAM) ने SC/ST कोटे के भीतर उप-वर्गीकरण की वकालत की। पार्टी का तर्क है कि मुसहर समुदाय जैसे कई उप-समूह वर्तमान आरक्षण ढांचे के बावजूद पूरी तरह मुख्यधारा में नहीं आ पाए हैं। यह मांग अगस्त 2024 में आए सुप्रीम कोर्ट के उस ऐतिहासिक फैसले के बाद और तेज हुई है, जिसमें राज्यों को SC/ST श्रेणियों के भीतर उप-वर्गीकरण करने की अनुमति दी गई है।
चिराग पासवान का कड़ा रुख
लोक जनशक्ति पार्टी (राम विलास) के प्रमुख चिराग पासवान ने इस पर सख्त तेवर अपनाए हैं। उनका तर्क है कि आरक्षण का आधार सामाजिक और ऐतिहासिक भेदभाव है, न कि आर्थिक स्थिति। वे आरक्षण में 'क्रीमी लेयर' को लागू करने के विचार को संवैधानिक अधिकारों के खिलाफ मानते हैं। इस मुद्दे पर असहमति इतनी बढ़ गई है कि चिराग पासवान ने आरक्षण में बदलाव का समर्थन करने वाले मंत्रियों के इस्तीफे तक की मांग कर दी है।
सरकार और बाजार पर असर
केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में स्पष्ट किया है कि SC/ST श्रेणियों पर क्रीमी लेयर का कॉन्सेप्ट लागू नहीं होता है, जो इसे OBC आरक्षण से अलग बनाता है। हालांकि दिल्ली के जंतर-मंतर पर आरक्षण सुधार की मांग को लेकर विरोध प्रदर्शन भी जारी हैं। निवेशकों के नजरिए से देखें तो यह पूरी तरह से एक सामाजिक-राजनीतिक घटना है। भारतीय शेयर बाजार या किसी कॉर्पोरेट इकाई पर इसका कोई सीधा आर्थिक प्रभाव नहीं है। हालांकि, बिहार NDA गठबंधन की एकजुटता पर नजर रखना जरूरी है, क्योंकि यह वहां की सियासी स्थिरता को प्रभावित कर सकता है।
