भारतीय बाजार में बड़ा बदलाव देखने को मिला है। Q1 FY27 में Nifty 500 के कुल मुनाफे में मिड-कैप कंपनियों की हिस्सेदारी बढ़कर **18.2%** हो गई है, जो चार साल पहले महज **9.1%** थी।
मुनाफे में बड़ा उलटफेर
इक्विटी मार्केट में मिड-कैप कंपनियों का दबदबा बढ़ता जा रहा है। पिछले चार सालों के आंकड़ों पर नजर डालें तो जहाँ लार्ज-कैप कंपनियों (Nifty 100) का प्रॉफिट शेयर 78.7% से घटकर 70.9% रह गया है, वहीं मिड-कैप कंपनियों ने अपनी हिस्सेदारी दोगुनी कर ली है। यह ट्रेंड कंपनियों की तेजी से बढ़ती अर्निंग्स मोमेंटम को दर्शाता है।
वैल्यूएशन का डर
तेजी की इस दौड़ में मिड-कैप स्टॉक्स महंगे होते जा रहे हैं। वर्तमान में Nifty Midcap इंडेक्स 27 के फॉरवर्ड पीई (PE) मल्टीपल पर ट्रेड कर रहा है, जबकि Nifty 50 का मल्टीपल 18 के आसपास है। इसका सीधा मतलब है कि निवेशक मिड-कैप शेयरों के लिए काफी प्रीमियम चुका रहे हैं।
निवेशकों के लिए चेतावनी
भले ही इन कंपनियों ने रेवेन्यू में 20% की ग्रोथ दिखाई हो, लेकिन मार्जिन को लेकर अभी भी अनिश्चितता बनी हुई है। बाजार के जानकारों का मानना है कि यदि आने वाली तिमाहियों में अर्निंग्स में मामूली गिरावट भी आती है, तो मिड-कैप स्टॉक्स में लार्ज-कैप के मुकाबले तेज करेक्शन देखने को मिल सकता है। ग्लोबल इकोनॉमी और कमोडिटी की कीमतों में बदलाव भी इन कंपनियों के लिए बड़ी चुनौती साबित हो सकते हैं।
