Meta Share Price: AI पर भारी खर्च से Meta टूटा **6%**, कच्चे तेल की कीमतों ने बढ़ाई ग्लोबल टेंशन

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AuthorSaanvi Reddy|Published at:
Meta Share Price: AI पर भारी खर्च से Meta टूटा **6%**, कच्चे तेल की कीमतों ने बढ़ाई ग्लोबल टेंशन

Meta Platforms के शेयर में **6%** से ज्यादा की गिरावट आई है। निवेशक कंपनी के आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) पर किए जा रहे बड़े खर्च को लेकर चिंतित हैं। वहीं, मिडिल ईस्ट में तनाव के कारण कच्चा तेल **$98** प्रति बैरल के पार पहुंच गया है, जिससे महंगाई का खतरा बढ़ गया है।

AI खर्चे का दबाव

गुरुवार को Meta Platforms के शेयर में 6.1% की गिरावट देखी गई, जो जुलाई के बाद से सबसे बड़ी गिरावट है। हैरानी की बात यह है कि कंपनी का रेवेन्यू उम्मीद से बेहतर रहा, लेकिन मार्केट का सारा ध्यान इस बात पर है कि कंपनी AI इंफ्रास्ट्रक्चर पर कितना पैसा खर्च कर रही है। निवेशकों को डर है कि यह भारी-भरकम इन्वेस्टमेंट कब और कैसे प्रॉफिट में बदलेगा, इसका जवाब अभी साफ नहीं है।

सेक्टर में छाई मायूसी

AI इन्वेस्टमेंट पर ROI (रिटर्न ऑन इन्वेस्टमेंट) को लेकर यह डर सिर्फ Meta तक सीमित नहीं है। Lam Research जैसे सेमीकंडक्टर इक्विपमेंट मेकर्स के खराब नतीजों ने भी पूरे टेक सेक्टर का मूड बिगाड़ दिया है। बाजार अब लंबी अवधि के बड़े दांव के बजाय 'इमीडिएट प्रॉफिट' को प्राथमिकता दे रहा है।

कच्चा तेल और महंगाई का खतरा

टेक कंपनियों की चिंता के बीच, एनर्जी मार्केट में भी हलचल है। मिडिल ईस्ट में तनाव के चलते वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) क्रूड ऑयल 1.8% उछलकर $98.94 प्रति बैरल पर पहुंच गया है। बढ़ती तेल की कीमतें ट्रांसपोर्टेशन और बिजनेस की लागत बढ़ाती हैं, जिससे ग्लोबल महंगाई बढ़ने का खतरा पैदा हो गया है। भारत के नजरिए से देखें तो यह चिंताजनक है क्योंकि इससे इंपोर्ट बिल बढ़ता है और करेंसी पर दबाव आता है।

आगे क्या?

इन्वेस्टर्स के लिए फिलहाल दो चीजें महत्वपूर्ण हैं: टेक कंपनियां अपनी AI योजनाओं को कब तक मुनाफे में बदलती हैं और कच्चे तेल की कीमतों में कब स्थिरता आएगी। जब तक इन दोनों मोर्चों पर स्पष्टता नहीं आती, बाजार का मूड सतर्क रहने की उम्मीद है।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.