भारतीय बाजारों ने 9 अक्टूबर को लगातार आठ हफ्तों की गिरावट पर ब्रेक लगा दिया है, लेकिन निवेशकों के सामने अब नए मैक्रो (Macro) मोर्चे पर चुनौतियां खड़ी हैं। अगले हफ्ते बाजार की नजर IT कंपनियों के Q2 नतीजों, घरेलू महंगाई के आंकड़ों और **$100** प्रति बैरल से ऊपर बने क्रूड ऑयल की कीमतों पर रहेगी।
शुक्रवार, 9 अक्टूबर को Nifty-50 और Sensex ने निवेशकों को थोड़ी राहत दी है। आठ हफ्तों से जारी गिरावट का सिलसिला आखिर थम गया है। हालांकि, यह रिकवरी केवल एक शुरुआत है, क्योंकि आने वाला हफ्ता चुनौतियों से भरा है। बाजार की नजरें इस पर टिकी हैं कि सितंबर तिमाही के नतीजे कैसे रहते हैं और क्या घरेलू महंगाई के आंकड़े Reserve Bank of India की ब्याज दरों को लेकर नीति को प्रभावित करेंगे।
IT सेक्टर पर टिकी नजरें
Q2 FY27 की अर्निंग सीजन अब पूरी रफ्तार में है। Tata Consultancy Services के नतीजों के बाद, अब निवेशकों की नजरें Wipro, HCL Technologies और Tech Mahindra जैसी दिग्गज कंपनियों पर हैं। शेयरधारकों के लिए सिर्फ प्रॉफिट के आंकड़े ही काफी नहीं हैं, बल्कि यह देखना जरूरी है कि कंपनियां हायरिंग और क्लाइंट्स के प्रोजेक्ट स्पेंडिंग पर क्या रुख अपनाती हैं। निवेशक यह जानने के लिए उत्सुक हैं कि ग्लोबल मंदी के बावजूद डिजिटल सर्विस की डिमांड स्टेबल है या नहीं।
महंगाई और मैक्रो रिस्क
ग्लोबल एनर्जी की कीमतें एक बार फिर सिरदर्द बनी हुई हैं। Brent Crude Oil के लगातार $100 प्रति बैरल के ऊपर बने रहने से भारत का तेल आयात बिल काफी बढ़ रहा है। यह स्थिति इकोनॉमी के लिए मुश्किल खड़ी कर रही है, जिससे महंगाई बढ़ रही है और भारतीय रुपये पर दबाव बन रहा है। निवेशक अब Consumer Price Index और Wholesale Price Index के आंकड़ों पर नजरें गड़ाए बैठे हैं। यदि ये आंकड़े उम्मीद से ज्यादा आते हैं, तो केंद्रीय बैंक ब्याज दरों को लंबे समय तक ऊंचा रख सकता है, जिसका असर बैंकिंग, रियल एस्टेट और ऑटो सेक्टर पर पड़ना तय है।
इन सबके अलावा, विदेशी निवेशकों (FIIs) की बिकवाली भी मार्केट की रिकवरी में एक बड़ा रोड़ा बनी हुई है। आने वाले सत्रों में मार्केट की दिशा कॉर्पोरेट ग्रोथ, घरेलू महंगाई और एनर्जी कॉस्ट के तालमेल से तय होगी।
