Manufacturing Sector: देश की महज 10% फैक्ट्रियां पैदा कर रही हैं 72% आउटपुट, छोटे उद्योगों पर कर्ज का संकट

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AuthorMehul Desai|Published at:
Manufacturing Sector: देश की महज 10% फैक्ट्रियां पैदा कर रही हैं 72% आउटपुट, छोटे उद्योगों पर कर्ज का संकट

लेटेस्ट इंडस्ट्रियल डेटा ने भारत के मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर की पोल खोल दी है। जहां बड़ी कंपनियां इकोनॉमी को रफ्तार दे रही हैं, वहीं छोटे यूनिट्स भारी कर्ज और कम प्रोडक्टिविटी के जाल में फंसे हुए हैं।

मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में गहरी खाई

Annual Survey of Industries के ताजा आंकड़े चौंकाने वाले हैं। देश के मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में एक बड़ा स्ट्रक्चरल गैप साफ नजर आता है। आंकड़े बताते हैं कि 200 से ज्यादा कर्मचारियों वाली फैक्ट्रियां, जो कुल इकाइयों का महज 10.4% हैं, अकेले 72% वैल्यू क्रिएट कर रही हैं। यह स्पष्ट है कि कैपिटल-इंटेंसिव बड़ी कंपनियां ही देश की औद्योगिक ताकत हैं।

छोटे उद्योगों का संघर्ष

पिरामिड के दूसरे छोर पर स्थिति काफी चिंताजनक है। 10 या उससे कम कर्मचारियों वाले माइक्रो-यूनिट्स देश की कुल रजिस्टर्ड फैक्ट्रियों का 36% हैं, लेकिन कुल आउटपुट में इनका योगदान सिर्फ 2% ही है। वहीं, 50 कर्मचारियों वाली छोटी फैक्ट्रियां 71% संख्या होने के बावजूद केवल 10% वैल्यू जेनरेट करती हैं। छोटे यूनिट्स लो-प्रोडक्टिविटी के चक्र में फंसकर रह गए हैं।

कर्ज और तकनीक का फासला

इन छोटे उद्योगों के लिए सबसे बड़ा रिस्क 'डेट' (Debt) है। माइक्रो-यूनिट्स का लोन-टू-वैल्यू रेशियो 85% है, जबकि बड़ी कंपनियां सिर्फ 39% कर्ज पर निर्भर हैं। भारी कर्ज के कारण ये छोटे यूनिट्स न तो नई मशीनरी लगा पा रहे हैं और न ही रिसर्च पर खर्च कर पा रहे हैं।

क्या है सेक्टर का हाल?

2024-25 फाइनेंशियल ईयर की बात करें, तो पूरे सेक्टर ने 7.81% की आउटपुट ग्रोथ और 7.19% एम्प्लॉयमेंट ग्रोथ दिखाई है। लेकिन इनोवेशन के मामले में पूरा सेक्टर पिछड़ रहा है। सिर्फ 2.7% फैक्ट्रियों के पास ही फॉर्मल R&D विभाग हैं। निवेशकों के लिए यह समझना जरूरी है कि मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर की असली ताकत सिर्फ उन बड़े प्लेयर्स में है जो आधुनिक तकनीक और स्केल पर फोकस कर रहे हैं। अब मार्केट की नजर इस पर होगी कि क्या सरकारी नीतियां या प्रोडक्शन-लिंक्ड इंसेंटिव्स (PLI) इन छोटे और आर्थिक रूप से कमजोर उद्योगों को सहारा दे पाएंगे या नहीं।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.