मराठा आरक्षण की मांग को लेकर एक्टिविस्ट Manoj Jarange की भूख हड़ताल का आज 5वां दिन है। 12 सितंबर तक मांगें पूरी न होने पर मुंबई मार्च की चेतावनी से महाराष्ट्र में बिजनेस और सप्लाई चेन के प्रभावित होने की आशंका बढ़ गई है।
महाराष्ट्र के जालना स्थित अंतरवाली सरती में चल रही यह भूख हड़ताल अब एक गंभीर मोड़ पर पहुंच गई है। 2 सितंबर, 2026 से जारी इस आंदोलन में Manoj Jarange मराठा समुदाय को 'कुनबी' (Kunbi) का दर्जा देने की मांग कर रहे हैं। मेडिकल रिपोर्ट्स के अनुसार, उनके स्वास्थ्य में लगातार गिरावट दर्ज की गई है, क्योंकि वे ड्रिप (IV fluids) लेने से भी इनकार कर रहे हैं, जिससे तनाव और बढ़ गया है।\n\n### सरकारी बातचीत और अनिश्चितता\n\nअब तक प्रशासन और प्रदर्शनकारियों के बीच हुई बातचीत बेनतीजा रही है। हालांकि जिला प्रशासन ने उनसे संवाद करने की कोशिश की है, लेकिन Jarange की मांग है कि राज्य के शीर्ष नेतृत्व को सीधे बातचीत के लिए आगे आना होगा।\n\n### निवेशकों और बिजनेस पर क्या होगा असर?\n\nमहाराष्ट्र भारत की जीडीपी (GDP) और औद्योगिक हब (Industrial Hub) का मुख्य केंद्र है। ऐसी स्थिति में, किसी भी बड़े आंदोलन का सीधा असर मैन्युफैक्चरिंग और सप्लाई चेन पर पड़ सकता है। अतीत में भी बड़े विरोध प्रदर्शनों के कारण सड़कों को ब्लॉक किया गया है, जिससे ट्रांसपोर्ट में देरी और कमर्शियल एरिया में फुटफॉल कम होने जैसी समस्याएं देखी गई हैं।\n\n### आने वाले दिनों का रिस्क फैक्टर\n\nJarange ने 12 सितंबर, 2026 की डेडलाइन तय की है। यदि सरकार के साथ कोई ठोस समझौता नहीं होता है, तो मुंबई की ओर मार्च करने की चेतावनी दी गई है। अगर यह आंदोलन मुंबई महानगर क्षेत्र (MMR) तक पहुंचता है, तो प्रमुख परिवहन गलियारों और आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति में बड़ी बाधाएं आ सकती हैं।\n\nफिलहाल, स्थानीय व्यवसायों और निवेशकों के लिए सरकारी स्तर पर होने वाली बातचीत की हर हलचल पर नजर रखना सबसे जरूरी है, ताकि लॉजिस्टिक्स या किसी भी तरह के प्रतिबंध की स्थिति में पहले से सावधानी बरती जा सके।
