केंद्र सरकार द्वारा जनगणना टालने के बावजूद मणिपुर की घाटी के पांच जिलों में **24 घंटे** की आम हड़ताल जारी है। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि जब तक उन्हें लिखित आदेश नहीं मिलता, तब तक वे पीछे नहीं हटेंगे, जिससे स्थानीय व्यापार और ट्रांसपोर्ट पूरी तरह प्रभावित हैं।
मंगलवार, 1 सितंबर, 2026 को मणिपुर के पांच प्रमुख जिलों - इम्फाल ईस्ट, इम्फाल वेस्ट, थौबल, बिष्णुपुर और काकचिंग में आम जनजीवन पूरी तरह ठप रहा। यह हड़ताल 'कैंपेन फॉर जस्ट एंड फेयर डेलिमिटेशन' के नेतृत्व में की जा रही है, जिनकी मुख्य मांग है कि जनगणना से पहले नेशनल रजिस्टर ऑफ सिटिजन्स (NRC) को लागू किया जाए।
सरकार और प्रदर्शनकारियों के बीच गतिरोध
गृह मंत्री अमित शाह की अध्यक्षता में हुई उच्च स्तरीय बैठक के बाद, केंद्र सरकार ने 31 अगस्त, 2026 को ही जनगणना की प्रक्रिया को टालने की घोषणा कर दी थी। हाई कोर्ट ऑफ मणिपुर ने भी जनगणना कार्यों को स्थगित करने का निर्देश दिया है। इसके बावजूद, प्रदर्शनकारियों का कहना है कि जब तक उनके पास कोई आधिकारिक लिखित दस्तावेज नहीं पहुंचता, वे अपना आंदोलन वापस नहीं लेंगे।
व्यापार और इकोनॉमी पर असर
इस तरह की बार-बार होने वाली हड़तालों का असर सीधे तौर पर स्थानीय इकोनॉमी पर पड़ता है। बाजार बंद होने, सार्वजनिक परिवहन के रुकने और व्यापारिक संस्थानों के कामकाज ठप होने से सप्लाई चेन बुरी तरह बाधित हो रही है। ट्रेडर्स और लॉजिस्टिक्स ऑपरेटरों के लिए यह स्थिति अनिश्चितता का माहौल पैदा कर रही है, जो निवेश के नजरिए से चिंताजनक है।
अब बाजार और निवेशकों की नजरें इस पर टिकी हैं कि सरकार कब तक औपचारिक नोटिफिकेशन जारी करती है और राज्य में कब तक सामान्य स्थिति बहाल हो पाती है।
