मणिपुर सरकार ने जनगणना (Census) से पहले NRC लागू करने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई है। विधानसभा के सितंबर प्रस्ताव के बाद आई यह खबर प्रशासन और क्षेत्रीय स्थिरता के बीच संतुलन साधने की कोशिश है, जो बिजनेस कंटिन्यूटी के लिहाज से अहम है।
मणिपुर सरकार ने आधिकारिक तौर पर यह स्पष्ट कर दिया है कि राज्य में जनगणना से पहले नेशनल रजिस्टर ऑफ सिटीजन्स (NRC) की प्रक्रिया पूरी की जाएगी। यह निर्णय 2 सितंबर, 2026 को राज्य विधानसभा में पारित उस प्रस्ताव का हिस्सा है, जिसमें केंद्र सरकार से NRC अपडेट को जनगणना से प्राथमिकता देने का आग्रह किया गया था।
सरकार की क्या है रणनीति?
बीजेपी विधायक और सरकार के प्रवक्ता सपम रंजन ने 'कैंपेन फॉर जस्ट एंड फेयर डेलिमिटेशन' जैसे नागरिक समूहों को संबोधित करते हुए संयम बरतने की अपील की है। इन समूहों ने NRC की प्रगति के लिए 30 सितंबर की डेडलाइन तय की थी। सरकार का रुख साफ है कि वह केंद्रीय अधिकारियों के साथ मिलकर इस दिशा में सक्रिय कदम उठा रही है।
निवेश और बिजनेस के लिए रिस्क फैक्टर्स
क्षेत्र में काम कर रहे निवेशकों और कारोबारियों के लिए 'सोशल और एडमिनिस्ट्रेटिव स्टेबिलिटी' सबसे अहम पैमाना है। मई 2023 से जारी मैतेई और कुकी समुदायों के बीच के संघर्ष ने स्थानीय अर्थव्यवस्था को प्रभावित किया है। अनिश्चितता के कारण सप्लाई चेन में बाधा और छोटे उद्योगों के लिए व्यापार करना चुनौतीपूर्ण बना हुआ है। किसी भी तरह का विरोध प्रदर्शन ऑपरेशनल रिस्क को बढ़ा सकता है, जिससे व्यापारिक रास्तों पर असर पड़ने की संभावना है।
एडमिनिस्ट्रेटिव पॉलिसी का तालमेल
केंद्र सरकार ने पहले ही क्षेत्र में 2027 की जनगणना को टाल दिया है ताकि अस्थिर माहौल में सुधार का मौका मिल सके। अब राज्य सरकार के सामने बड़ी चुनौती यह है कि वह NRC की अपनी मांग को केंद्र की जनगणना टाइमलाइन के साथ कैसे सिंक्रोनाइज़ करती है। राज्य का प्रशासनिक तंत्र पहले ही सुरक्षा जरूरतों और विस्थापन प्रबंधन के कारण दबाव में है। निवेशकों को NRC टाइमलाइन और सुरक्षा स्थिति पर कड़ी नजर रखनी चाहिए, क्योंकि शांति और प्रशासनिक क्षमता ही राज्य के भविष्य के आर्थिक दृष्टिकोण को तय करेगी।
