बेंगलुरु पर निर्भरता कम करने के लिए कर्नाटक में हो रहे बड़े बदलाव का असर दिखने लगा है। Mangaluru-Udupi रीजन में टेक वर्कफोर्स बढ़कर **2.80 लाख** हो गई है और आईटी सेक्टर में **21%** की सालाना दर से ग्रोथ देखी जा रही है।
बेंगलुरु के बढ़ते इंफ्रास्ट्रक्चर दबाव और भारी लागत से बचने के लिए अब कंपनियां Mangaluru-Udupi कॉरिडोर को एक नए टेक हब के रूप में देख रही हैं। पिछले कुछ समय में यहाँ का माहौल पूरी तरह बदल गया है और यह रीजन एक सैटेलाइट मार्केट से निकलकर एक मुख्य टेक्नोलॉजी क्लस्टर बनता जा रहा है। आंकड़ों के अनुसार, यहाँ काम करने वालों की संख्या जो 2025 के अंत में 2.40 लाख थी, वह अब 2.80 लाख तक पहुंच गई है।
टेक सेक्टर का विस्तार
इस ग्रोथ के पीछे सबसे बड़ी वजह आईटी और आईटीईएस (ITeS) सेक्टर है, जिसमें 21% की सालाना बढ़ोतरी दर्ज की गई है। खास बात यह है कि अब यहाँ केवल एंट्री-लेवल काम नहीं हो रहे, बल्कि अनुभवी प्रोफेशनल्स की संख्या भी बढ़ी है। करीब 1.05 लाख ऐसे कर्मचारी हैं जिन्हें 1 साल से ज्यादा का अनुभव है, और कुल वर्कफोर्स का 46% हिस्सा मिड-लेवल टैलेंट का है।
सरकार की पहल और निवेश के अवसर
कर्नाटक डिजिटल इकोनॉमी मिशन (KDEM) के तहत सरकार राज्य की आर्थिक गतिविधियों को राजधानी से बाहर ले जाने पर जोर दे रही है। आईटी के अलावा, बीएफएसआई (BFSI) सेक्टर ने भी यहां अपनी पैठ बना ली है, जिसमें लगभग 16,400 प्रोफेशनल्स काम कर रहे हैं।
निवेशकों और कंपनियों के लिए यह बदलाव फायदेमंद साबित हो सकता है। बेंगलुरु के मुकाबले छोटे शहरों में ऑफिस चलाने की लागत कम है और माइग्रेशन में 20% की गिरावट आई है, जिसका मतलब है कि कंपनियों के लिए रिक्रूटमेंट खर्च कम होगा और स्टाफ रिटेंशन बेहतर होगा। हालांकि, भविष्य की ग्रोथ इस बात पर निर्भर करेगी कि यहां का इंफ्रास्ट्रक्चर, बिजली और हाई-स्पीड कनेक्टिविटी की सुविधा ग्लोबल कंपनियों की जरूरतों को कितनी मजबूती से पूरा कर पाती है।
