महाराष्ट्र सरकार राज्य में Uniform Civil Code (UCC) लागू करने की दिशा में तेजी से कदम उठा रही है। सरकार आगामी शीतकालीन सत्र में इसे बिल के रूप में पेश करने की योजना बना रही है, जिसके लिए एक एक्सपर्ट कमेटी अपनी सिफारिशों को अंतिम रूप दे रही है।
महाराष्ट्र सरकार यूनिफॉर्म सिविल कोड (UCC) को लेकर अपनी रणनीति पर आगे बढ़ रही है। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने स्पष्ट किया है कि सरकार नागपुर में होने वाले आगामी शीतकालीन सत्र में इस कानून का बिल पेश करने की तैयारी में है। यह कदम राज्य के कानूनी ढांचे में एक बड़े बदलाव की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
सात सदस्यीय एक्सपर्ट पैनल
इस प्रक्रिया के लिए सरकार ने एक सात सदस्यीय एक्सपर्ट कमेटी का गठन किया है, जिसकी कमान सुप्रीम कोर्ट की पूर्व जज जस्टिस (रिटायर्ड) रंजना देसाई के हाथों में है। जुलाई 2026 में बनी यह कमेटी अब नए कानूनी ढांचे के लिए अपनी सिफारिशों को अंतिम रूप देने में जुटी है। रिपोर्ट सौंपे जाने के बाद सरकार तुरंत इसे लागू करने की प्रक्रिया शुरू कर देगी।
NDA का 2029 तक बड़ा लक्ष्य
यह कदम NDA के उस व्यापक विजन का हिस्सा है, जिसके तहत केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने 2029 तक 21 राज्यों में समान नागरिक कानून लागू करने का लक्ष्य रखा है। महाराष्ट्र अब उन राज्यों की सूची में शामिल होने की तैयारी कर रहा है जो इस राष्ट्रीय नीतिगत लक्ष्य को पूरा करने की दिशा में काम कर रहे हैं।
प्रशासनिक और कानूनी चुनौतियां
इतने बड़े स्तर पर कानूनी बदलाव करना अपने आप में जटिल प्रक्रिया है, जिसमें भारी प्रशासनिक तैयारियों और संसाधनों की जरूरत होती है। हालांकि यह कोई कॉर्पोरेट घटना नहीं है, लेकिन इसकी प्रक्रिया और लागू होने की टाइमलाइन राज्य के प्रशासनिक वर्कलोड और रिसोर्स एलोकेशन पर असर डाल सकती है।
आने वाले दिनों में यह बिल सामाजिक चर्चाओं और कानूनी बहस का केंद्र बन सकता है। निवेशकों और नजर रखने वालों के लिए कमेटी की अंतिम रिपोर्ट के मुख्य बिंदु सबसे महत्वपूर्ण होंगे, क्योंकि वही तय करेंगे कि कानून का दायरा कितना व्यापक होगा और इसे लागू करने की गति क्या रहेगी।
