महाराष्ट्र के पालघर जिले के तुळ्यापाड़ा गांव में एक सामुदायिक सोलर सिंचाई परियोजना ने कमाल कर दिखाया है। यहाँ सामूहिक स्वामित्व वाले मॉडल ने न केवल पलायन को **90%** तक कम किया है, बल्कि खेती को भी साल भर चलने वाला मुनाफे का जरिया बना दिया है।
सिंचाई का नया मॉडल
महाराष्ट्र के पालघर जिले के मोखाड़ा ब्लॉक में स्थित तुळ्यापाड़ा गांव में सोलर आधारित सिंचाई परियोजना ने ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई दिशा दी है। पहले जहाँ किसान केवल मॉनसून पर निर्भर थे, अब वहां साल भर खेती हो रही है। इस बदलाव के कारण यहां से होने वाला मौसमी पलायन 90% तक घट गया है।
सामूहिक स्वामित्व का फायदा
इस प्रोजेक्ट को 'प्रगति प्रतिष्ठान' (Pragati Pratishthan) ने 'Gram Oorja Private Solutions' के साथ मिलकर शुरू किया है। इसमें मुख्य चुनौती सिंचाई की महंगी मशीनों की थी। इसे सुलझाने के लिए 10 किसानों के समूह को एक सोलर पंप सिस्टम दिया गया, जिससे निवेश का बोझ कम हो गया। इसके अलावा, सीएसआर (CSR) फंडिंग ने भी बुनियादी ढांचे के खर्च को कवर किया।
आर्थिक आंकड़ों की कहानी
साल 2019 से 2025 के बीच गांव में खेती योग्य जमीन 5 एकड़ से बढ़कर 96 एकड़ हो गई है। किसानों ने प्याज और मूंगफली जैसी महंगी फसलों पर ध्यान देना शुरू किया है। 108 परिवारों की कुल वार्षिक कृषि आय 2021 के ₹18.3 लाख से बढ़कर 2024 तक ₹31 लाख के पार पहुंच गई है। खेत की मेड़ पर फलदार पौधे लगाने से किसानों के पास अतिरिक्त कमाई का जरिया भी बना है।
भविष्य की राह
यह मॉडल उन क्षेत्रों के लिए एक सटीक उदाहरण है जो सूखे की मार झेलते हैं। हालांकि, इस मॉडल की सफलता में उपकरणों का रखरखाव और भूजल का जिम्मेदारी से उपयोग करना बेहद महत्वपूर्ण है। यह प्रोजेक्ट साबित करता है कि अगर तकनीक को सामुदायिक स्तर पर सुलभ बनाया जाए, तो ग्रामीण भारत की आर्थिक तस्वीर पूरी तरह बदली जा सकती है।
