महाराष्ट्र सरकार ने अग्निवीरों के लिए बड़ा फैसला लिया है। अब उन्हें राज्य पुलिस और सुरक्षा बलों में भर्ती के लिए किसी भी लिखित प्रवेश परीक्षा से नहीं गुजरना होगा।
महाराष्ट्र सरकार ने केंद्र की 'अग्निपथ' स्कीम के तहत अपना कार्यकाल पूरा करने वाले अग्निवीरों को राज्य पुलिस और सुरक्षा सेवाओं में सीधे शामिल करने की नीति का ऐलान किया है। इस नई नीति के तहत भर्ती प्रक्रिया को सरल बनाया गया है, जिसमें अब उम्मीदवारों को किसी भी तरह की लिखित परीक्षा या बेसलाइन ट्रेनिंग असेसमेंट से नहीं गुजरना होगा। प्रशासन का मुख्य उद्देश्य इन अनुभवी सैनिकों को उनकी सैन्य विशेषज्ञता के अनुरूप जिम्मेदारियां सौंपना है।
सुरक्षा ढांचे में होगा बदलाव
इस पहल का सबसे बड़ा फोकस राज्य की सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करना है, विशेष रूप से तटीय क्षेत्रों में। नेवी के पूर्व अग्निवीरों को उनकी समुद्री अनुभव के आधार पर तटीय सुरक्षा (Maritime Security) में प्राथमिकता दी जाएगी। सैन्य सेवा से नागरिक पुलिस व्यवस्था में बदलाव को सहज बनाने के लिए सरकार 3 महीने के विशेष ट्रेनिंग प्रोग्राम भी चलाएगी, ताकि ये जवान सिविलियन जिम्मेदारियों को कुशलता से संभाल सकें।
आयु सीमा और अन्य सुविधाएं
ट्रांजिशन को आसान बनाने के लिए सरकार ने ऊपरी आयु सीमा में 4 साल की छूट देने का फैसला किया है। इसके साथ ही, पूर्व सैनिकों के लिए निर्धारित 10% आरक्षण का ढांचा भी बरकरार रखा गया है।
सरकारी खजाने पर असर और भविष्य की राह
प्रशासन ने यह भी स्पष्ट किया है कि यदि मौजूदा रिक्तियां कम पड़ती हैं, तो सरकार नई पोस्ट भी क्रिएट करेगी। जानकारों का मानना है कि इससे राज्य के पेरोल खर्च और बजट पर आने वाले सालों में सीधा असर पड़ेगा। फिलहाल, सरकार अब भर्ती की समय-सीमा और नई रिक्तियों की आधिकारिक अधिसूचना जारी करने की तैयारी में है।
